वेब 3.0 क्या है | WEB 3.0  इंटरनेट को कैसे बदलेगी

वेब 3.Oक्या है

 WEB 3.0 kya hai -इंटरनेट का थर्ड जनरेशन को ही वेब 3.0 कहा गया है इसका मतलब यह है कि आने वाले वक्त में data किसी एक जगह host नही होगा इसमें data का प्रवाह cloud से  होगा 

हाय दोस्तों कैसे हैं आप सब उम्मीद  करते हैं इंटरनेट और सोशल नेटवर्किंग की इस जिंदगी सभी अपने अपने काम में व्यस्त होंगे और अच्छे  होंगे

आजकल इंटरनेट की दुनिया में वेब 3.0 का क्रेज चल रहा है चलिए आज इसके  बारे में जानते है ,WEB 3.0 kya hai के बारे में आपको कंप्लीट जानकारी देते हैं

वेब 3.Oक्या है

इंटरनेट का ऐसा टेक्नोलॉजी है जिसमें डाटा स्टोरेज करने का तकनीकी बदल जाएगा आमतौर पर किसी वेबसाइट या user का डाटा किसी एक जगह ही स्टोर होता है जिसे वेब सर्वर कहा जाता है

किंतु आने वाले वक्त में डाटा किसी एक जगह सेव नहीं होगा,डाटा का डिसेंट्रलाइज हो जाएगा जिससे कई virtual server से हम डाटा को क्लाउड रूप से हमें एक्सेस करना पड़ेगा

 वेब 3.O कैसे काम करता है

दुनिया में उपस्थित हर किसी वस्तु या ऑब्जेक्ट का चाहे वह जीवित हो या निर्जीव  हो कोई एक जगह पर पाया जाता है या फिर सभी जगह पाया जाता है या तीसरा कंडीशन  हो सकता है कि सभी जगह हल्का-हल्का पाया जाय

इस प्रकार का शब्द वेब 3.0 के लिए मैं  उपयोग कर रहा हूं क्योंकि जो मैंने आपको बताया यह उसी टर्मिनोलॉजी पे काम करती है

आमतौर पर हमारे द्वारा लिया गया डाटा किसी वेब सर्वर से ही प्राप्त होता है जो हमें इंटरनेट के द्वारा ही प्राप्त होता है लेकिन इंटरनेट के तीसरा जनरेशन के बाद फोर्थ जनरेशन आया और उसके बाद फिफ्थ जनरेशन,

इसके बाद ही डाटा का डिसेंट्रलाइजेशन का बात होने लगा जिसके द्वारा डाटा किसी एक जगह पर सेव नहीं होगा , डाटा को हम क्लाउडली प्राप्त कर पाएंगे

अब यहां पर क्लाउड का मतलब होगा आसमान में डाटा का फैला हुआ होना  मतलब हमारे वेबसाइट का डाटा किसी एक जगह सेव नहीं होगा बल्कि डाटा कई server में सेव होगा

जिसे क्लाउड होस्टिंग और क्लाउड कंप्यूटिंग कहा जा सकता है 

 जिससे कि अगर हम दुनिया के किसी कोने पर भी हो तब उस स्थान पर मौजूद सर्वर द्वारा हम अपना डाटा एक्सेस कर पाएंगे इसके लिए सेटेलाइट बेस्ट इंटरनेट सर्विस का उपयोग करना होगा

 आमतौर पर हम जो अभी इंटरनेट यूज करते हैं उसमें सभी मोबाइल फोन हमारे अगल-बगल के किसी टावर से कनेक्टेड होते हैं उसके बाद यह टावर द्वारा सेटेलाइट को इंफॉर्मेशन भेजा जाता है फिर वही इंफॉर्मेशन सरवर से सेटेलाइट द्वारा लेकर मोबाइल टावर से होते हुए हमारे मोबाइल पर भेज आता है

जिससे कि डाटा कई जगह से होते हुए हम तक पहुंचता है इसका मुख्य नुकसान बहुत ज्यादा संसाधन का उपयोग करना है जिससे कि इंटरनेट सुविधा की महंगाई भी बढ़ जाती है

डेटा की सुरक्षा और  पारदर्शिता के लिए वेब 3.O का कांसेप्ट का लाया गया है

इसमें हो सकता है की  डाटा का भंडारण के लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा जिसमें डेटा एक छोटे-छोटे ब्लॉक के रूप में सभी server में स्टोर होंगे

और जब डाटा को एक साथ मर्ज किया जाएगा ऑनलाइन तभी वह अपने आप में एक कंपलीट डाटा होंगे

 इस प्रकार ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी (   ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी क्या है )में डाटा को एक्सेस करने के लिए थोड़ा सा अधिक वक्त लगता है किंतु यह पूरी तरह से सिक्योर होता है जिससे कि डाटा किसी गलत हाथों में नहीं पड़ता और उसका गलत उपयोग नहीं होता

वेब का तीसरा वर्जन लाने का उद्देश्य अपने आप में बड़ा है पहले से लेकर अभी तक देखा जाए तो डाटा का उपयोग करना और डाटा स्टोर करना दोनों की तकनीक अलग थी

किंतु वर्तमान और फ्यूचर में डाटा को डिसेंट्रलाइज्ड कर देने से डाटा का मिस यूज होने का संभावना नहीं होता,बशर्ते यह जो डांटा है यह सही जगह पर स्टोर हो

वेब 3.O के फायदे

  • डाटा सिक्योर होगा जिससे इसका मिस यूज नहीं किया जा सकेगा
  • डाटा स्टोरेज की मोनोपोली टेक्नोलॉजी कम्पटीशन बढ़ाएगी और नई टेक्नोलॉजी का जन्म होगा
  • दुनिया में गुड गवर्नेंस का शुरुआत होगा
  • डाटा के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं कम होगी क्योंकि इसके लिए डाटा को हैक करना पड़ेगा और ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में डाटा को हैक करना बहुत मुश्किल है
  • लोगों और गवर्नमेंट्स में पारदर्शिता बढ़ेगी
  • डाटा स्टोरेज की मोनोपोली सिस्टम होने की वजह से डाटा में एकाधिकार जमाने की व्यवस्था खत्म होगी

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वेब 3.0 क्या है

इंटरनेट और क्लाउड कंप्यूटिंग की नई टेक्नोलॉजी ने वेब 3.0 का कांसेप्ट लाया है और यही हमारा फ्यूचर है. आने वाले वक्त में क्लाउड कंप्यूटिंग का बहुत ज्यादा उपयोग होगा जिसमें हमारा डाटा क्लाउडली हमारे पास आएगा जिसके लिए इंटरनेट बहुत ज्यादा जरूरी है

 देखा जाए तो एक नए युग की शुरुआत हो रही है जिसमें डाटा स्टोर और डाटा सर्व करने की नए-नए टेक्नोलॉजी आ रहे हैं कभी वह वक्त था जब हमारे द्वारा ले देकर जीपीआरएस चला करता था

जिससे कि इंटरनेट की 1st generation द्वारा इंटरनेट सप्लाई किया जाता था जिस की स्पीड बहुत कम थी उसके बाद डाटा प्रोसेस मे boosting आई इसके बाद 3G और 4G ने इंडिया में संचार क्रांति की एक नई शुरुआत की

और अब 5G और ऑप्टिकल फाइबर टेक्नोलॉजी द्वारा डाटा की डिसेंट्रलाइजेशन से स्पीड और ज्यादा बढ़ेगी और डेटा की सिक्योरिटी भी बढ़ेगी अब आने वाला वक्त बताएगा कि इसने और क्या-क्या चेंज आएंगे

 web 3.0  के बारे में आपको हमारी यह जानकारी कैसे लगी प्लीज हमें कमेंट जरूर करें और क्वेश्चन भी जरूर पूछें

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