विद्युत ऊर्जा उत्पादन के स्रोत |विद्युत शक्ति संयंत्र के प्रकार | विद्युत ऊर्जा उत्पादन के तरीके

विद्युत ऊर्जा उत्पादन के स्रोत

किसी मशीन को चलाने के लिए हमें हमेशा विद्युत शक्ति की जरूरत पड़ती है और यह विद्युत हमें कई प्रकार की प्रक्रियाओं को कर विद्युत ऊर्जा प्राप्त होती है, तो आज हम आपको बताएंगे की विद्युत शक्ति किन-किन तरीकों से प्राप्त की जाती है चलिए विद्युत शक्ति उत्पन्न करने के बहुत सारे   विद्युत शक्ति सयंत्रो के बारे में जानते है की विद्युत ऊर्जा  कहां कहां से प्राप्त हो सकते हैं इसके बारे में हम विस्तार से जानेंगे

जैसे कि आप सब तो जानते  होंगे की विद्युत उत्पादन करने के लिए हमेशा डायनेमो की जरूरत पड़ती है जो एक यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है

 इसी डायनेमो का उपयोग कर हर जगह विद्युत उत्पादन किया जाता है,लेकिन विद्युत उत्पादन के तरीके अलग अलग हो सकते हैं जिसमें कई तरीके शामिल है

जैसे -ताप विद्युत संयंत्र, जल विद्युत संयंत्र ,नाभिकीय शक्ति संयंत्र और ज्वारीय ऊर्जा विद्युत ऊर्जा के उत्पादन के स्रोत है चलिए हम एक-एक करके इनके बारे में विस्तार से जानते हैं

ताप विद्युत शक्ति केंद्र 

इस प्रकार के ऊर्जा उत्पादन केंद्र में कोयला को जलाकर भाप उत्पन्न किया जाता है इस भाप का उपयोग टरबाइन को घुमाने के लिए किया जाता है और यह टरबाइन डायनेमो से जुड़ा होता है टरबाइन जब घूमता है तब डायनेमो के  सॉफ्ट को घुमाने लगती है जिससे यांत्रिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होती है

इस प्रकार के संयंत्रों में बहुत ज्यादा कोयला का उपयोग किया जाता है जिससे बहुत ज्यादा मात्रा में राख का उत्पादन होता है जिससे पर्यावरण प्रदूषण भी होता है इस प्रकार के संयंत्र में उत्पन्न भाप का बहुत ज्यादा होना बहुत जरूरी है

 जिससे कि टरबाइन को पूरी शक्ति के साथ घुमाया जा सके किंतु यह कोयला अनवीनीकरण स्रोत है ऊर्जा का इसलिए एक समय बाद ताप विद्युत संयंत्र में कोयले की समस्या आ सकती है,इसके अलावा दूसरी और पर्यावरण समस्याएं भी हैं

जल विद्युत संयंत्र

यह एक ऊर्जा प्राप्ति का नवीनीकरण माध्यम है जिसमें किसी प्रकार की प्रदूषण नहीं होती है इसमें जल की स्थितिज ऊर्जा का उपयोग उपयोग कर  विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जाती है

जल विद्युत संयंत्र को किसी बांध में स्थापित किया जाता है, बांध में विशाल जल राशि संग्रहित होती है जिसका उपयोग टरबाइन पर गिरा कर स्थितिज ऊर्जा का गतिज ऊर्जा के रूप मे उपयोग कर टरबाइन को घुमाया जाता है

 यह टरबाइन डायनेमो से जुड़ा होता है इस प्रकार जल के स्थितिज ऊर्जा का उपयोग कर गतिज ऊर्जा में परिवर्तन किया जाता है और यह यांत्रिक ऊर्जा परिवर्तित होकर हमें विद्युत ऊर्जा के में प्राप्त होती है

विद्युत ऊर्जा जो हमें जल से प्राप्त होती है इसके लिए जरूरी है कि नदियों में हमेशा पानी रहे इसके लिए हमें जल संरक्षण का काम भी करना चाहिए जिससे कि विद्युत ऊर्जा हमें हमेशा प्राप्त होते रहे

जल विद्युत संयंत्र का  दुष्प्रभाव यह है कि इसके लिए बड़े-बड़े बांध बनाए जाते हैं जिससे हाइड्रो पावर प्लांट स्थापित किए जाते हैं,किंतु यह बड़े-बड़े बांध किसी एक जगह पर विशाल जल राशी को संग्रहित करते है जिससे कभी-कभी भूकंप भी उत्पन्न करते हैं जिससे  पर्यावरणीय और मानवीय क्षति होती है

नाभिकीय शक्ति संयंत्र 

जिसको हम इंग्लिश में न्यूक्लियर पावर प्लांट कहते हैं इसमें भी यांत्रिक ऊर्जा का ही उपयोग कर  विद्युत ऊर्जा उत्पन्न किया जाता है,

किंतु इसमें उपयोग किए जाने वाला ईंधन नाभिकीय ऊर्जा का उपयोग किया जाता है जो कि बहुत खतरनाक होता है

इसके लिए ऐसा जगह ढूंढा जाता है जिसकी आस पास समुद्र हो या कोई बड़ा झील हो इसका कारण यह है कि जब कभी नाभिकीय संयंत्र में रेडिएशन फैले तब उस जल का उपयोग रेडिएशन रोकने में किया जा सके 

खैर यह तो सुरक्षा की बात हुई चलिए हम अब बात करते हैं की नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र में विद्युत ऊर्जा किस प्रकार उत्पन्न की जाती है इसके लिए नाभिकीय रिएक्टर बनाए जाते हैं

 जिसमें यूरेनियम 235 का उपयोग कर रहा है उसका विखंडन कराया जाता है जिससे तीन अन्य नाभिक पदार्थ और तीन न्यूट्रॉन उत्पन्न होते हैं इस क्रिया में बहुत अधिक मात्रा में ताप उर्जा उत्पन्न होता है

इस तापीय ऊर्जा का उपयोग कर बॉयलर से भाप ऊर्जा उत्पन्न किया जाता है इस भाप से टरबाइन को चलाकर यांत्रिक ऊर्जा उत्पन्न किया जाता है यह यांत्रिक ऊर्जा डायनेमो से विद्युत ऊर्जा उत्पादन करने के लिए आवश्यक होती है

देखा जाए तो यह थर्मल पावर प्लांट जैसे सिस्टम का उपयोग यहां भी किया जाता है किंतु इसमें मुख्य अंतर यह है कि नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र में नाभिकीय पदार्थ का पदार्थ का उपयोग किया जाता है और थर्मल पावर प्लांट में कोयले की शक्ति का उपयोग कर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न किया जाता है

नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र का मुख्य दोष है कि इससे  ऊर्जा उत्पन्न करने में बहुत ज्यादा ध्यान रखना होता है और बहुत खर्चीला होता है इसके अलावा इससे नाभिकीय संकट भी उत्पन्न होते हैं जो पूरे पर्यावरण को दूषित कर सकती है जिससे कई हेल्थ से संबंधित जीव जंतुओं में समस्या आती है अतः नाभिकीय ऊर्जा का उपयोग विद्युत उत्पादन में बड़ी सावधानी से किया जाना चाहिए

सौर ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करना

सौर ऊर्जा का उपयोग कर भी विद्युत ऊर्जा उत्पन्न किया जाता है इसके लिए बड़े-बड़े सोलर पैनल का उपयोग किया जाता है जो अर्धचालक धातु के बने होती हैं, इन धातुओं को प्लेट की शक्ल में ढालकर बड़े-बड़े पैनल बनाया जाता है

यह अर्धचालक सिलिकॉन या जर्मीनियम होते हैं इन पर जब सूर्य का प्रकाश पड़ता है तब सूर्य की प्रकाश ऊर्जा का परिवर्तन कर यह विद्युत ऊर्जा उत्पादन करते हैं यह ऊर्जा का नवीनीकरण साधन है और सबसे अच्छा भी है,

क्योंकि ये पर्यावरण प्रदूषण नहीं करता और ना ही इसके उपयोग से किसी प्रकार की किसी को समस्या होती है इसमें आपको बस सोलर पैनल को सूर्य की किरण की दिशा में स्थापित करना है

इस सोलर पैनल से वायर निकालकर हम इसकी विद्युत ऊर्जा को सीधे उपयोग कर सकते हैं या बैटरी में रासायनिक ऊर्जा के रूप में विद्युत ऊर्जा को संग्रहित कर सकते हैं और जब जरूरत होती है तब इस रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा के रूप में उपयोग किया जा सकता है

ज्वारीय ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करना

इसके लिए हम समुद्र के पानी का उपयोग कर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न कर सकते हैं, जैसे कि आपको पता है समुद्री पानी में ज्वार भाटा आते रहता है जब जवार आता है तब पानी की लहरों की ऊंचाई बढ़ जाती है और यह जमीन की ओर आने लगती है इस ज्वारीय ऊर्जा का उपयोग पानी का भंडारण मे किया जाता है 

और इस भंडारित पानी की स्थितिज ऊर्जा का उपयोग टरबाइन चलाने हेतु किया जाता है जिससे पानी की स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होकर डायनेमो के जरिए से विद्युत उत्पादन किया जा सकता है

 इस प्रक्रिया में जब जवार आता है तब भी टरबाइन चलता है और जब भाटा होता है तब समुद्री पानी वापस समुद्र में चला जाता है इस प्रकार इस टाइम भी टरबाइन को चलाकर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न किया जाता है 

इस प्रकार का टेक्नोलॉजी आजकल कई देशों में उपयोग किया जा रहा है क्योंकि इससे ना तो पर्यावरण प्रदूषण होता है और ना ही किसी प्रकार की और समस्या आती है

भूतापीय ऊर्जा से विद्युत उत्पादन

 यह एक ऊर्जा उत्पादन करने का नवीनीकरण तरीका है इसमें पृथ्वी की कई जगहों पर गरम पानी या गर्म गैस का फव्वारा भूतल से ऊपर आता है,

 इस फव्वारे या  पानी के कुंड में पानी का तापमान अधिक होता है इस तापमान का उपयोग कर भाप जनरेट किया जाता है,जिससे टरबाइन चला कर विद्युत ऊर्जा उत्पादन किया जा सकता है

हमने अपने एक पोस्ट में बताया भी है कि -भूतापीय उर्जा क्या है और भूतापीय उर्जा से विद्युत उत्पन्न कैसे करें  आप इस पोस्ट को पढ़कर जो भूतापीय एनर्जी के बारे में आपको पूरी जानकारी मिलेगी

महासागरीय तापीय ऊर्जा

यह भी उर्जा का एक नवीनीकरण साधन है इसमें समुद्र के पानी की सतह में और समुद्र के पानी के अंदर की तल में उपस्थित पानी में तापमान का अंतर होता है

 इसी समुद्री पानी के तापांतर का उपयोग कर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न किया जाता है यह रासायनिक आधारित विद्युत उत्पादन संयंत्र का उपयोग किया जाता है इसके लिए जो विद्युत संयंत्र बनता है इसे समुद्र के बीचो-बीच स्थापित किया जाता है और इससे जो ऊर्जा उत्पन्न होता है उसी को वायर जरिए जमीन तक पहुंचाया जाता है

आपने क्या सीखा -विद्युत ऊर्जा उत्पादन के स्रोत |AND विद्युत ऊर्जा उत्पादन के तरीके

तो दोस्तों आपको कैसी लगी हमारी यह जानकारी की विद्युत ऊर्जा कौन-कौन से तरीकों से उत्पन्न की जा सकती है आपने पढ़ कर जाना होगा कि विद्युत  ऊर्जा उत्पन्न करने के बहुत सारे साधन है

जिसमें से तापीय ऊर्जा,हाइड्रो पावर इसके अलावा थर्मल एनर्जी इन सब के द्वारा विद्युत उत्पन्न की जाती है लेकिन इनमें से कुछ ऐसे भी चीजें हैं जिनसे पर्यावरण प्रदूषण होता है

जैसे कि थर्मल पावर द्वारा उर्जा उत्पन्न करने से क्योंकि इससे कोयला का उपयोग किया जाता है जिसे बहुत ज्यादा मात्रा में उत्पन्न होता है उम्मीद है आपको या हमारी यह जानकारी अच्छी लगी हो इसी प्रकार की अन्य जानकारी के लिए आप हमारी blog पर बने रहे

हमारी वेबसाइट का नाम vigyantk.com है 

और भी पढ़े >

Share this

Leave a Comment

Don`t copy text!