वसा क्या है | कार्य, गुण, प्रकार,वसा की संरचना

वसा क्या है ( vasa kya hai )

सजीवों के शरीर में उत्पन्न प्राकृतिक योगिक होते हैं जोकि  कार्बनिक विलायक मे विलेय होते हैं ,वसा का जल अपघटन कराने से हमें वसीय अम्ल प्राप्त होता है जिसका उपयोग जीव धारियों द्वारा किया जाता है

आप सभी को पता होगा कि वसा एक ऐसा पदार्थ है जो सभी जीवो के लिए आवश्यक होता है,वसा को इंग्लिश में LIPID कहा जाता है

वसा एक प्रकार का कार्बनिक यौगिक है जो पानी में घुलनशील नहीं होता है. यह कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बना होता है. वसा ह्यूमन बॉडी के लिए अति आवश्यक है क्योंकि यह बॉडी को ऊर्जा प्रदान करता है, कोशिकाओं को संरक्षित करता है और हार्मोन का उत्पादन में सहायता करता है.

 वसा मुख्यतः  दो प्रकार के होते हैं: संतृप्त और असंतृप्त.

  •  संतृप्त वसा आमतौर पर मीट  के उत्पादों में पाए जाते हैं, जैसे कि मांस, डेयरी और अंडे. 
  • असंतृप्त वसा आमतौर पर वनस्पति से बनने वाले तेलों में पाए जाते हैं, जैसे कि जैतून का तेल, सूरजमुखी का तेल और सोयाबीन तेल. 
  • संतृप्त वसा कोलेस्ट्रॉल के लेवल को बढ़ा देता है, जो हृदय के लिए एक जोखिम कारक बनता है.
  • असंतृप्त वसा कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम कर सकता है और हृदय रोग के जोखिम को भी कम कर सकता है. वसा का सेवन सीमित करना महत्वपूर्ण है,

वसा का मुख्य घटक क्या है

वसा का मुख्य घटक फैटी एसिड होता है वसा कार्बन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बने कार्बनिक यौगिक होते हैं जिसमें कार्बन की मात्रा ऑक्सीजन से अधिक होती है

वसा में क्या क्या शामिल हैं

वसा के अंतर्गत मोम खाद्य तेल मक्खन प्राकृतिक रबर कोलेस्ट्रोल आदि शामिल होते हैं

 वसा की संरचना

वसा का निर्माण के लिए ग्लिसरीन  का एक मॉलिक्यूल और और वसा के तीन  मॉलिक्यूल का संयोग होने पर पानी के निष्कासन के कारण बनता है इस प्रकार देखा जाए तो सरल वसीय अम्ल ग्लिसरोल के ईस्टर होते हैं 

वसीय अम्लों के प्रकार

फैटी एसिड को दो प्रकार में बांटा गया है जिसमें पहला है असंतृप्त वसीय अम्ल और दूसरा असंतृप्त वसीय अम्ल

असंतृप्त वसीय अम्ल

ऑयल और वासा में छोटी श्रृंखलाएं असंतृप्त वसीय अम्ल होती हैं इसमें हाइड्रोकार्बन श्रृंखला के बीच दो बंध  नहीं पाए जाते हैं

संतृप्त वसीय अम्ल

कठोर वसा भी  संतृप्त वसा अम्लो से बनी होती हैं इस प्रकार के वसा अम्लों में कार्बन श्रृंखलाएं असंतृप्त होती है जिसमें एक से अधिक डबल बॉन्ड होती हैं असंतृप्त वसीय अम्ल के उदाहरण है 

ओलिक अम्ल, नीलोनिक अम्ल आदि

वसा की श्रेणियां

जो वसा 20 सेंटीग्रेड तापमान पर द्रव के रूप में होती हैं उन्हें तेल कहा जाता है जबकि कुछ लिपिड सामान्य तापमान पर भी ठोस होती हैं उन्हें वसा कहा जाता है

असंतृप्त वसा में जब निकिल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन गैस प्रवाहित की जाती है तब यह संतृप्त fat में बदल जाता है और इसी को वनस्पति घी कहा जाता है और यह प्रक्रिया हाइड्रोजेनेशन कहलाती है

वसा  की श्रेणी के हिसाब सेवसा  को सरल लिपिड, संयुक्त लिपिड, व्युत्पन्न लिपिड और अवर्गीकृत लिपिड में बांटा गया है चलिए एक -एक कर इन लिपिडो के बारे में जानते हैं

सरल लिपिड

सरल लिपिड को सामान्य भाषा में ट्राइग्लिसराइड कहा जाता है यह विभिन्न प्रकार के अल्कोहल और वसीय अम्लो के योगिक या ईस्टर होते हैं प्रत्येक सरल लिपिड कई छोटे अणुओं से मिलकर बना होता है

सरल रिपीट के अंतर्गत वसा और मोम शामिल होती हैं

संयुक्त लिपिड

जटिल लिपिड हमेशा कार्बन हाइड्रोजन ऑक्सीजन और नाइट्रोजन और फास्फोरस के योगिक  होते हैं इसमें ग्लिसरोल से संयोजित ना होकर किसी अन्य रासायनिक अम्ल से संयोजित होती हैं

संयुक्त लिपिड पानी में घुलनशील होता है किंतु दूसरे fatty सॉल्वेंट में अघुलनशील होता है

संयुक्त लिफ्ट में संयुक्त लिपिड में फास्फोलिपिड लेसीथीन शामिल होते हैं

व्युत्पन्न लिपिड

सरल एवं जटिल योगी के जल अपघटन के फलस्वरूप प्राप्त लिपिक को व्युत्पन्न लिमिट कहा जाता है sterol and steroids इसके  उदाहरण है

अवर्गीकृत लिपिड 

यह वह पदार्थ होते हैं जो वसिय अम्लो से कोई भी समानता नहीं रखते किन्तु  इन्हें केवल समान घुलनशील  लिपिड कहा गया है

वसा के कार्य क्या है

  • वसा अतिरिक्त वसा के रूप में कोशिकाओं और ऊतकों में इकट्ठा हो जाता है
  • रक्षक आवरण के रूप में  शरीर के बाहरी परत पर इकट्ठा हो जाता है और शरीर के अंदरूनी भाग को सुरक्षित करता है
  • लिपिड्स सभी जीवो का सामान्य भोजन है जिसको हम घी,मक्खन दूध पनीर अधिक रूप में प्राप्त करते हैं
  • विलायक के रूप में -लिपिड विटामिन विटामिन ए विटामिन डी विटामिन ई और विटामिन  के के लिए विलायक का काम करता है
  • ऊष्मा रोधी के रूप में शरीर की त्वचा के नीचे इकट्ठा होकर तापमान को शरीर के अंदर प्रवेश करने से रोकती है और शरीर का तापमान एक समान बनाए रखने के लिए भी जिम्मेदार होती है
  • अनेक वसा अम्लों के संश्लेषण और ट्रांसपोर्टेशन के लिए जिम्मेदार होती है
  • शरीर में उत्पन्न होने वाले अनेक प्रकार के हारमोंस का संश्लेषण करने के लिए जिम्मेदार होता है
  • कोशिकाओं की रचनात्मक आवरण और उनके आकार को स्टेबल करने के लिए वसा जिम्मेदार होता है
  • लिपिड श्वसन की क्रिया में उपयोग किया जाता है इसकी कैलोरी मान अत्यधिक होता है जिसके कारण इससे ऊर्जा अधिक प्राप्त होती है
  • तंत्रिका तंत्र और उसी प्रकार के अन्य अंगों के लिए यह मुख्य रा मटेरियल का काम करता है
  •  वसा के गुण
  • वसा तेल एवं पानी में अब घुलनशील होता है लेकिन यहां क्लोरोफॉर्म बेंजीन मैं घुलनशील होता है
  • वसा स्वाद और गंधहीन  होती हैं
  • वसा सामान्य ताप पर ठोस और तापमान देने पर द्रव बन जाती है
  • वसा सामान्य ताप को रोकने का काम करती है अर्थात शरीर का ताप नियंत्रण करती है

FAQ- वसा क्या है

  1. वसा के कार्य:

    ऊर्जा प्रदान करना,अंगों और ऊतकों को सुरक्षित रखना,विटामिनों को अवशोषित करना,हार्मोनों का उत्पादन करना,त्वचा को स्वस्थ रखना

  2. वसा किसमें पाया जाता है:

    मांस,मछली,दूध और डेयरी उत्पाद,अंडे,फलियां,नट्स,बीज, तेल

  3. वसा की अधिकता से होने वाले रोग:

    हृदय रोग ,स्ट्रोक,मोटापा,टाइप 2 डायबिटीज,कुछ प्रकार के कैंसर,

  4. वसा के उदाहरण:

    संतृप्त वसा: घी, मक्खन, नारियल तेल, पाम तेल
    असंतृप्त वसा: जैतून का तेल, सोयाबीन तेल, मूंगफली का तेल, अलसी का तेल
    ट्रांस फैट: कुछ प्रकार के पैक किए गए खाद्य पदार्थों, जैसे कि कुकीज़, बिस्कुट, और पैनकेक में पाया जाता है

  5. वसा के लक्षण:

    वजन बढ़ना,त्वचा में चर्बी बढ़ना,मुंहासे,बालों का झड़ना,थकान,मूड स्विंग्स,मासिक धर्म संबंधी समस्याएं,

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