ऊतक किसे कहते हैं | ऊतक के प्रकार

ऊतक किसे कहते हैं

प्रकृति में उपस्थित सभी प्रकार की जीव जंतु प्रारंभिक संरचना हेतु जिम्मेदार कारक कोशिका होता है किंतु इसके अंतर्गत भी जीवधारी में ऐसे अंग होते हैं जो शरीर में उपस्थित सभी अंगों में संबंध का काम करती है इस प्रकार की कोशिका को ऊतक कहा जाता है

यह ऊतक कई प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है और शरीर में विभिन्न कार्यों को करने में प्रमुख जिम्मेदारी निभाता है

उत्तक की परिभाषा

 जीवधारी में पाए जाने वाले एक ही प्रकार के आकार, परिमाप वाले कोशिकाओं का समूह जो उत्पत्ति रचना और विकास और कार्य की दृष्टिकोण से एक समान हो ऊतक कहलाता है

ऊतक शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग बिचट नामक वैज्ञानिक द्वारा 1771 और 1802 के बीच किया गया था  उत्तक का अध्ययन जीव विज्ञान की एक विशेष शाखा के अंतर्गत किया जाता है जिसे हिस्टोलॉजी कहा जाता है, हिस्टोलॉजी की स्थापना इटली की एक वैज्ञानिक मारशेलो मैलपिघी की द्वारा किया गया था किंतु हिस्टोलॉजी शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग meyer द्वारा किया गया

ऊतक के प्रकार

उत्तक के प्रकार ऊतक कई प्रकार के पाए जाते हैं जो की उत्पत्ति रचना और कार्यों के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं जिसमें से हैं   –  उपकला ऊतक , संयोजी ऊतक, पेशीय ऊतक और तंत्रकीय ऊतक

उपकला ऊतक   ( epithelial tissue )

यह जीवधारी के बाहरी भीतरी सतह पर पाई जाती है इनकी कोशिकाएं आपस में चिपकी होती हैं जिनके कारण कोशिकाओं के बीच में खाली स्थान नहीं होता है इन कोशिकाओं के बीच में रुधिर कोशिकाएं भी नहीं पाई जाती है इस प्रकार के क्यों ऊतक में लसिका तंत्र पाया जाता है

उपकला ऊतक की उत्पत्ति भ्रूण की तीन प्राथमिक स्तर से होती है जिसमें त्वचा की इपिडर्मिस की उत्पत्ति actoderm से, देह गुहा की एपिडर्मिस की मिजोडर्म से और आहार नाल के एपिथीलियम की उत्पत्ति endoderm से होती है

उपकला ऊतक  शरीर की बाहरी आवरण आहार नाल की आंतरिक सतह और फेफड़ों पर पाए जाते हैं

इस प्रकार की कोशिका स्तरों में पाई जाती है और कोशिकाएं सती हुई होती है जिनके बीच में खाली स्थान नहीं पाई जाती है इस प्रकार की कोशिकाओं में  बाहरी आवरण झील्ली से घिरा रहता है जिस आधार झिल्ली कहा जाता है

  संयोजी ऊतक  ( connective tissue )

संयोजी ऊतक जीवधारी में शरीर की सभी प्रकार की अंगों को जोड़ने का काम करती है जैसे की हड्डी से हड्डी का जोड़,हड्डी से मांसपेशी का जोड़ती हैं, इसके कारण इसकी मात्रा शरीर में बहुत अधिक होती हैं 

इसकी उत्पत्ति misoderm से होती हैं इसकी हमारे शरीर में 30 % हिस्सों में control होता है 

संयोजी ऊतक 3 प्रकार की घटको से मिलकर बना होता है

संयोजी ऊतक के कार्य 

  • इसके द्वारा शरीर की विभिन्न अंगों को जोड़कर समन्वय स्थापित करता है
  • यह शरीर के आंतरिक अंगों का सुरक्छा करता है
  • शरीर में सवाहन का कार्य कर रोग फैलाने वाले कारको से बचाता है

संयोजी ऊतक के प्रकार

  • सरल संयोजी ऊतक
  • रेशेदार संयोजी ऊतक
  • कांकली संयोजी ऊतक
  • सवंहनीय संयोजी ऊतक
  • पेशीय संयोजी ऊतक

 पेशीय ऊतक  (  muscular tissue )

किस प्रकार की ऊतक हमारे शरीर में विभिन्न प्रकार की अंगों को गति प्रदान करने के लिए  काम में आते हैं यह शरीर में अंदर और बाहरी  भाग में पाए जाते हैं

इनकी काम  करने के तरीके के आधार पर इन्हें रेखित और अरेखित पेसी में बाटा गया है 

रेखित पेशीय को ऐच्छीक पेशी के नाम से जाना जाता है क्योंकि ऐसे अंग पर हमारा कण्ट्रोल होता है जैसे हाथ पैर इत्यादि 

 अरेखित पेसी को  अनऐच्छीक पेशी के नाम से जाना जाता है क्योंकि इनपे हमारा कोई कण्ट्रोल नही होता जैसे आँखों की पलक झपकना 

इसके अलावा भी हमारे शरीर में बहुत सारे ऐसे अंग है जिसने जिन्हें हम खुद निर्देश नहीं दे सकते उन पर सिर्फ हमारा दिमाग का कंट्रोल होता है जैसे की हृदय फेफड़ा पाचन तंत्र इत्यादि यह सभी सहायक अंग होते हैं जो हमारे शरीर को चलाने के लिए आवश्यक होते हैं इसलिए इन सब पर हमारे मास्टर ग्रंथि का नियंत्रण होता है

जहां पर दो प्रकार की अस्थियां मौजूद हूं और इन दोनों अस्थियों के बीच में उपस्थित होकर अस्थि के सहारे से दूसरे अंग मैं प्रतिक्रिया उत्पन्न करती है जिसकी वजह से शरीर में बहुत सारे कार्य संपन्न हो पाते हैं इसकी वजह से ही इंसान का चलना भगाना जैसे कार्य संपन्न होते हैं

पेशीय ऊतक के कार्य

  • बाहरी शारीरिक गतिविधियां पेशीय ऊतक कारण ही संपन्न हो पाते हैं
  • हाथ पैर चलना जैसे कार्य पेशीय  ऊतक द्वारा किए जाते हैं
  •  हड्डियों को अपनी जगह पर घूमना
  • मुख में उपस्थिति होकर जीभ और जबड़े  को संचालित करना

  तंत्रकीय ऊतक   ( Nervous tissue )

तंत्र की ऊतक में हमारे शरीर में पाए जाने वाले तंत्रिका तंत्र शामिल होते हैं क्योंकि यह तंत्रिका तंत्र कई छोटे-छोटे कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं और तंत्रकीय ऊतक कहलाते हैं इनके द्वारा हमारे शरीर से शारीरिक आवेग,क्रिया, प्रतिक्रिया जैसे कार्य संचालित किए जाते हैं तंत्रकीय ऊतक में न्यूरॉन्स न्यूरोलॉजी axon डेंड्रिटाईट्स जैसे अंग शामिल होते हैं

जब हमारे शरीर पर तंत्र क्यों तक ऊतक कार्य नहीं कर पाते हैं तब इंसान को पैरालिसिस अटैक आता है जिस कारण शरीर में बहुत सारे अंग में आवेग नहीं पहुंच पाता है और बाहरी शारीरिक गतिविधियां बंद हो जाती है जिसके कारण शरीर विकलांग हो जाता है

  • तंत्रकीय ऊतक के कार्य
  • शरीर में सभी अंगों के बीच सीमेंट में स्थापित करना
  • शारीरिक आवेग को एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचाना

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