फीता कृमि क्या है | फीता कृमि का नामांकित चित्र | tapeworm In hindi

फीता कृमि क्या है

यह एक प्रकार का परजीवी जीव है जो जीवो के अंदर भोजन या पानी के साथ अंदर पहुंचकर आहार नाल में अपनी जीवन बिताता है,आहार नाल से पोषक पदार्थ ग्रहण कर अपना जीवन चलाता है

इसका आकार बहुत पतला होता है और लंबा होता है जिस वजह से यह किसी भी फीता ( tape) के सामान दिखाई देता है जिस कारण इसे फीता कृमी ( tapeworm ) कहा जाता है 

 शिशु अवस्था में यह बहुत ही छोटा होता है किंतु जब यह व्यस्क हो  जाता है तब इतना बड़ा हो जाता है कि इसे सामान्य आंखों से देखा जा सकता है

यह अपनी पूरी जिंदगी आहार नाल में बिताता है और वही प्रजन्न कर अपनी संतान भी पैदा करता है, अब तो आपको पता चल गया होगा की फीता कृमि क्या है

फीता कृमि किन किन जीवो में पाया जाता है

पृथ्वी में जितने भी प्रकार के बड़े जीव हैं जिस में शामिल हैं 1 चूहे से लेकर एक विशाल blue whel की आहार नाल पर फीता कृमि पाए जाते हैं अधिकांश जल और भोजन के साथ अंदर जाकर आहार नाल में अपने जीवन चक्र पूरा करते हैं

इंसानों में भी फीता कृमि छोटी आत और बड़ी आंत में पाया जाता है

फीता कृमि का नामांकित चित्र

फीताकृमि क्या है

फीता कृमि की संरचना

  • फीता कृमि एक विशेष परिस्थिति में अपना जीवन चक्र चलाता है जिसमें वह किसी दूसरे जीव के अंदर परजीवी के रूप में रहकर आप अपना विकास करता है माहौल के अनुसार रूपातंरित होने की वजह से उसके शरीर में सभी अंग माहौल के अनुसार रूपांतरित होते हैं इसी के आधार पर इस चपटे क्रीमी में उत्सर्जन और समवहन तंत्र नहीं पाया जाता
  •  इसकी वजह से इसमें बहुत सारे अंग जो जरूरी होते हैं वही पाए जाते हैं इसमें खंडित और साखित  पाचक गुहा शरीर में पाया जाता है इसमें ऑक्सीजन और भोजन को विसरण के द्वारा शरीर के अंदर लाया जाता है और विसरण के द्वारा ही शरीर से बाहर भी किया जाता है
  •  इसमें उत्सर्जन के लिए विशिष्ट ज्वाला कोशिकाएं पाई जाती है इसके अतिरिक्त इसके शरीर के चारों ओर क्यूटिकल का आवरण होता है जिसमें चूसक की उपस्थिति पाई जाती है इसके अतिरिक्त एक स्थान से दूसरे जगह जाने के लिए प्रचलन अंग नहीं पाए जाते हैं और फीता कृमि में तीव्र प्रजनन क्षमता देखा जाता है

फीता कृमि किस प्रकार किसी जीव को प्रभावित करता है

फीता कृमि एक परजीवी है जो खुद किसी दूसरे जीव पर आश्रित होकर उससे पोषक पदार्थ ग्रहण करता है इस स्थिति में वह आहार नाल में स्थित होकर अपने मुह द्वारा आहार नाल से चिपक कर आहार नाल से ही हमारे शरीर से पोषक पदार्थ ग्रहण करता है

इस स्थिति में फीता कृमि अपना विकास करते हुए प्रजनन भी करता है और अपनी संख्या बढ़ाते रहता है जिसकी वजह से बहुत ज्यादा संख्या में फीता कृमि शरीर में पाए जाने पर पोषक पदार्थ की कमी हो जाती है जिसकी वजह से व्यक्ति कमजोर हो जाता है

अधिकांश इस प्रकार की समस्या छोटे बच्चों में अधिक दिखाई देता है क्योंकि उनमें फीता कृमि बहुत आसानी से प्रवेश कर अपना विकास करने लगता है और बच्चों के पोषक तत्व को चूस कर उन्हें कमजोर बनाता है इस कारण बच्चे कमजोर हो जाते हैं और पतले दिखाई देते हैं जिसके कारण अन्य भी बीमारी होने लगते हैं

फीता कृमि के लक्षण

  • यह परजीवी मनुष्य की आंत में पाया जाता है
  • फीता कृमि की द्वीपर्शवा सममित होता है जिसमे शरीर का विभेदिकरण और विकास होता है 
  • परजीवी ओं में पोषक से चिपकने के लिए एक विशेष प्रकार का हुक और चूसक अंग पाए जाते हैं
  •  परजीवी में देहगुहा अनुपस्थित होती है जिसके कारण देहभित्ति और उसके अंदर के अंगों के बीच एक ठोस तथा ढीला ढाला मध्य उतक पाया जाता है
  • इनमें पाचन तंत्र कम विकसित हुआ होता है जिसके कारण गुदाद्वार नहीं पाया जाता
  • इस परजीवी में शरीर कई खंडों में विभाजित होता है किंतु पूरी तरह खंडित नहीं होता है

conclusion – फीता कृमि क्या है

दोस्तों हमने इस पोस्ट पर आपको बताने की कोशिश की है कि कि जिवो में एक प्रकार का परजीवी होता है जो शरीर के अंदर अंत में पाया जाता है जिसे फीता कृमि कहा जाता है यह फीता कृमि पिता के समान है पतला होता है और पाचन तंत्र पर निर्भर होकर अपना विकास और प्रदान करता है जिसकी वजह से शरीर में पोषक पदार्थों की कमी आ जाती है और बहुत सारे भी प्रभाव पड़ते हैं इसके अतिरिक्त ने बताया है कि फीता कृमि की संरचना कैसे होती है उम्मीद है आपकी सवाल फीता कृमि किसे कहते हैं पसंद आया होगा

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