रंध्र किसे कहते है | stomata meaning in hindi

रंध्र किसे कहते है ( Stomata kya hai )

आप सभी जानते हैं कि पेड़ पौधे द्वारा वाष्प उत्सर्जन और प्रकाश संश्लेषण जैसे कार्य की जाती हैं जिसकी कारण वाष्प और गैस का आदान-प्रदान होता है इसके अतिरिक्त और भी बहुत सारे कारण हैं जिसमें रंध्र की भूमिका पेड़ पौधों के लिए बहुत ज्यादा होती है और इन सब को जानने के लिए हमें रंध्र की संरचना  और रंध्र के कार्य के बारे में जानना होता है , आज हम इस पोस्ट पर आपको बताएंगे कि रंध्र क्या है और रंध्र कैसे काम करते हैं

रंध्र किसे कहते है

रंध्र पेड़ पौधों की पत्तियों में पाए जाने वाला ऐसा संरचना है जिसकी वजह से पौधों में उपस्थित जल का स्थानांतरण जल, गैस और वास्प के रूप में वातावरण में होता है ,रंध्र पत्तियों का आंतरिक भाग होता है पत्तियों पर रंध्र की संख्या प्रत्येक वर्ग सेंटीमीटर में 1000 से लेकर 1 लाख तक हो सकता है

रंध्र की खोज किसने की थी

जूलियन जोसेफ वेस्क ने  रंध्र की खोज किया था 

रंध्र की संरचना विस्तार से

रंध्र पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाला एक आंतरिक संरचना है जो परवलयकार  रचना युक्त होता है यह दो विशिष्ट प्रकार की कोशिकाओं से घिरा हुआ होता है जिन्हें रक्षक कोशिकाएं भी कहा जाता है

पेड़ पौधों में पौधों को एक बीज पत्री और द्विबीजपत्री पौधों में बांटा गया है,इसकी आधार पर इसमें पाये जाने वाले रंध्र की संरचना भी विशिष्ट होती है एक बीज पत्री पौधों में पाया जाने वाला रक्षक कोशिकाएं डंबल की आकार की होती है जबकि द्विबीजपत्री पौधों में पाया जाने वाला रक्षक कोशिका गुर्दाकार होता है

रक्षक कोशिका में पाए जाने वाली रंध्र की  ओर पायी जानी वाली कोशिका भित्ति मोटी और अप्रत्यास्त होती है कि जबकी बाकि  कोशिका भित्ति पतला प्रत्यास्थ और पारगम्य होता है

प्रत्येक रक्षक कोशिकाओं में आम कोशिका के समान ही कोशिका द्रव केंद्रक और अधिक मात्रा में क्लोरोप्लास्ट पाए जाते हैं

जिस प्रकार रंध्र के चारों ओर रक्षक कोशिका पाई जाती हैं उसी प्रकार रंध्र के चारों ओर भी सहायक कोशिका पाई जाती है यह सहायक कोशिकाएं रंध्र को खुलने और बंद होने के लिए रक्षक कोशिकाओं की सहायता करते हैं इसकी क्रियाविधि को क्रियान्वित होने के लिए “आसमान स्थूलता” की भी भूमिका होती है

stomata की संरचना- boolet point

रंध्र सभी प्रकार की पतियों में पाया जाने वाला आवश्यक है

  1. प्रत्येक stometa में दो सेम जैसी संरचना युक्त द्वार कोशिका होती है
  2. द्वार कोशिकाओं की बाहरी भित्ति पतली औऱ अंदर की भित्ति मोटी होती है
  3. द्वार कोशिका में cloroplast पाया जाता है
  4. द्वार कोशिका में उपस्थित chloroplast रंध्र को खुलने औऱ बंद होने की क्रिया को नियंत्रित करते है
  5. रंध्र के आसपास पायी जाने वाली कोशिका को सहायक कोशिका ( subsidiary cells ) कहा जाता है
  6. रंध्र, द्वार कोशिका औऱ सहायक कोशिका आपस में मिलकर stomatal system ( रंध्रीय तंत्र ) का निर्माण करते हैं

रंध्र के पाए जाने के आधार पर प्रकार

जैसे कि हमने आपको बताया कि पेड़ पौधे दो प्रकार के होते हैं एक बीज पत्री और द्विबीजपत्री इन दोनों पौधों में रंध्र की उपस्थिति भी अलग होती है द्विबीजपत्री पौधे की पत्तियों में पाए जाने वाला रंध्र पत्तियों के निचले स्तर पर होता है जबकि एक बीज पत्री पौधों के पत्तियों में पाए जाने वाला रंध्र दोनों सतहों पर होता है

 सेब शहतूत प्रकार का रंध्र- इनमें पाया जाने वाला रंध्र पतियों की निचली सतह पर पाए जाते हैं जैसे सेब आडू इत्यादि

आलू के प्रकार पर आधारित रंध्र –  इनमें पाया जाने वाला रंध्र निचले सतह पर निचले सतह पर बहुत अधिक होता है किंतु निचली सतह पर कम होता है

जई प्रकार के रंध्र- इन में पाए जाने वाले इनमें पाया जाने वाले रंध्र  पत्तियों के दोनों सतह पर पाए जाते हैं और बराबर मात्रा में पाए जाते हैं

,क्योंकि इसमें पाया जाने वाला पत्तियां समद्विपार्श्विक होती हैं  ex – जई मटर गेहूं आदि

जलीय लीली प्रकार के रंध्र- इस प्रकार के रंध्र केवल जलीय पौधों में पाए जाते हैं क्योंकि इनके पत्ते पानी में तैरते रहते हैं इस कारण इन पौधों में रंध्र पत्तों के ऊपरी स्थान पर पाए जाते हैं

फोटोमोसीटान प्रकार का- अगर कोई  पौधा पानी में पूरी तरह डूबा हुआ होता है तब ऐसे पौधों में पाए जाने वाले पत्तियों में रंध्र नहीं होते या फिर होते हैं तो कार्य विहीन होते हैं उदाहरण हाइड्रिला

रंध्र के प्रकार

रेनन कुलस प्रकार का- इसमें पाया जाने वाली रक्षक कोशिकाएं के चारों ओर 5 सहायक कोशिकाएं पाई जाती है यह सभी सहायक कोशिकाएं बाह्य त्वचीय कोशिकाओं के समान होती है

इस प्रकार की स्थिति में पाए जाने वाले रंध्र -ANOMOCYTIC STOMTA कहलाता है

क्रूषि फेरस प्रकार का- इमें पाए जाने वाला रक्षक कोशिका इसमें पाया जाने वाला कोशिका तीन सहायक कोशिकाओं से घिरा होता है

Rubiaceous प्रकार – इसमें रक्षक कोशिका 2 सहायक कोशिकाओं से घिरा होता है और यह सहायक कोशिकाएं रंध्र के लंबे अक्छ के समांतर उपस्थित होते हैं इन्हें पैरासाइक्लिक रंध्र कहा जाता है

Caryophyllaceous प्रकार – इसमें सहायक कोशिकाएं सिर्फ दो पाए जाते हैं जो रक्षक कोशिकाएं के चारों ओर घिरे हुए रहती हैं यह सहायक कोशिका रक्षक कोशिका की परपेंडिकुलर होता है

Actinocytic प्रकार – इनमें रक्षक कोशिकाओं के चारों ओर ये कोशिकाएं एक बीज पत्री पौधे में चार संख्या में पाए जाते हैं और आरिया प्रकार के रूप में व्यवस्थित होते हैं

रंध्र के खुलने के आधार पर प्रकार

Alfalfa type – इसमें पाया जाने वाला रंध्र 24 घंटे खुला रहता है और यह सिर्फ पतली पत्तियों वाले पौधे में पाया जाता है, मूली, मटर, सरसों, सेम में इसी प्रकार का रंध्र पाया जाता है

Potao type – इस प्रकार के अंदर भी दिन और रात दोनों टाइम ओपन होते हैं किंतु शाम को कुछ घंटो के लिए बंद रहते हैं

Oat type – इस प्रकार के रंध्र दिन में कुछ वक्त के लिए खुलते हैं और रात को बंद रहते हैं ex मक्का जौ गेहूं जई

Equisetum type – इस प्रकार के रंध्र कभी बंद नहीं होते हैं

रंध्र के कार्य

1 stomata द्वारा वातावरण के साथ गैसीय आदान प्रदान का माध्यम उपलब्ध कराया जाता है

2 वातावरण से कार्बन डाई ऑक्साइड का संग्रहण किया जाता है

3 वातावरण में ऑक्सीजन गैस छोड़ा जाता है 

4 जल का उत्सर्जन करता है

5 जल का अवशोसन करने में सहायक है 

6  पेड़ पौधे द्वारा अपने अंदर के ताप को नियंत्रित किया जाता है

CONCLUSION- रंध्र किसे कहते है ( Stomata Meaning in Hindi)

दोस्तों स्टोमेटा सभी वनस्पति में पाया जाने वाला आवश्यक अंग है जिसके द्वारा पेड़ पौधों द्वारा बहोत सारे काम किये जाते है इस पोस्ट पर हमने आप लोगो को बताने का कोशिश किया है की स्टोमेटा क्या है  ( stomata kya hai )

इसके अतिरिक्त हमने स्टोमेटा के कार्य औऱ स्टोमेटा के संरचना के बारे में भी आपको जानकारी दी है

उम्मीद है यह पोस्ट आपको रंध्र के बारे में पूरी जानकारी देगी औऱ आप

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