स्लिप डिस्क क्या है | स्लिप डिस्क और साइटिका के बारे में इस पोस्ट में जानकारी देंगे 

स्लिप डिस्क क्या है ईसको हर्नियाटेड डिस्क  क्यों कहा जाता है

आइए स्लिप डिस्क क्या है- इसके बारे में विस्तार से जानते हैं ,

जब शरीर की हड्डी में से शॉक अब्जॉर्बर करने वाली  डिस्क अगर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र जो सिर से लेकर पैर तक होती है को दबाती है तब इसकी वजह से कमर और नीचे पैर तक दर्द और जलन होता है यह समस्या स्लिप डिस्क या हर्नियाटेड डिस्क के कारण होती है

साइटिका क्या है

इसमें भी central nervous system प्रभावित होती है इसमें जब तंत्रिका तंत्र दोनों legs में जाती हैं तब कमर से निचे legs की ओर जाते वक्त कमर और legs आस पास कही पर तंत्रिका तंत्र पर हल्का सा दबाव बनता है जिससे कमर और पैरो में दर्द के साथ weakness फील होती है

साइटिका- स्लिप डिस्क से नर्व के दबने की वजह से भी होती है 

स्लिप डिस्क के लक्षण क्या है

  • कमर से लेकर पैर तक जलन होता है
  • कमर में जहा डिस्क स्लिप हुआ है वहां असहनीय दर्द होगा
  • अगर दर्द तंत्रिका तंत्र से होकर सिर तक पहुंच जाता है तब सर में कान के आस पास सनसनाहट है
  • imuity डाउन हो जाता है

स्लिप डिस्क को जानने के लिए केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को जानना होगा

स्लिप डिस्क को जानने के लिए आपको केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को जानना होगा उसके बाद हम आपको बताएंगे की स्लिप डिस्क और हर्नियाटेड डिस्क कैसे होता है

हमारे शरीर में सभी अंगों का नियंत्रण केंद्रीय तंत्रिका तंत्र द्वारा किया जाता है यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, सिर में दिमाग के पिछले भाग पर उपस्थित pons नामक जगह से प्रारंभ होकर गले से होते हुए कमर में जाकर दोनों पैरों में जाता है

 केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के लिए गले से लेकर कमर तक एक अनुकूल जगह में स्टेबल क्या हुआ होता है जो पूर्णता प्राकृतिक है

इसमें केंद्रीय तंत्रिका तंत्र रीड की हड्डी के बीच से होकर गुजरती है और दिमाग की सूचनाओं को पूरे शरीर में फैल आती है

इसके वजह से ही आप जो काम करना चाहते हैं इन कामों को आप कर पाते हैं,ऐसे कामों को ऐच्छिक कहा जाता है और जिन कामों को करने के लिए आपको अपनी इच्छा की जरूरत नहीं होती उन्हें अनैच्छिक कहा जाता है

जैसे कि आप पैदल चल रहे हैं और आपके पैरों के नीचे काटा गया तब जैसी पैर उस कांटे पर पड़ेगा आपका पैर तुरंत ही उस जगह से हट जाता है जोकि केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के डिफेंस मेकैनिजम्स के कारण होता है

 आमतौर पर शरीर में होने वाले जितने भी एक एक्छीक और अनएक्छीक काम होते हैं वह तंत्रिका तंत्र द्वारा ही किए जाते हैं

स्लिप डिस्क के कारण

  • हमने इससे पहले केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के बारे में बात की जो की रीड की हड्डी के बीच से होकर सर से लेकर कमर तक आती है
  •  रीढ़ की हड्डियों के बीच में पूरे शरीर की झटके को अवशोषित करने के लिए ऐसा कोशिका का एक संरचना होता है जो शरीर में होने वाले झटकों को सोख लेती है और शरीर को हानी होने से बचाती है इन्हे हम shok absorver कहते हैं 
  • यह कोशिका का बना डिस्क गले से लेकर कमर तक दो हड्डियों के बीच में पाया जाता है इस आधार पर गले से लेकर कमर तक कुल जीतने हड्डी पाए जाते हैं और उनके बीच कोशिका का बना शॉक अब्जॉर्बर बना होता है
  • जब कभी इंसान को चोट लगती है जोकि कमर से लेकर गले तक की रीड की हड्डी में प्रभाव डालती हो ऐसी अवस्था में कभी कभार स्लिप डिस्क की समस्या आ जाती है
  • स्लिप डिस्क में कोशिक हड्डियों के बीच उपस्थित डिस्क अंदर की ओर घुस जाता है या अंदर की ओर ही कोशिका डैमेज हो जाती है और इसके अंदर में पाया जाने वाली लिक्विड बाहर आ जाती है जो सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर दबाव डालती है
  • दबाव पड़ने की वजह से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ढंग से काम नहीं कर पाती है क्योंकि प्रकृति ने केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को इतना सुरक्षित बनाया है कि वह दो हड्डियों के बीच में से होकर गुजरता है किंतु कभी-कभार जब चोट लगती है तब डिस्क हर्नियाटेड हो जाती है
  •  इसकी वजह से केंद्रीय केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ढंग से काम नहीं कर पाती और उसमें सूजन भी आ जाता है जिसकी वजह से दर्द और जलन होने लगता है और यही दर्द और जलन सही वक्त पर इलाज ना किया जाए तो बहुत ज्यादा बढ़ जाती है

स्लिप डिस्क रीड की हड्डी में कहां कहां होता है

स्लिप डिस्क रीड की हड्डी में कहीं भी हो सकता है यह डिपेंड करता है की चोट कैसा लगा और कहां पर लगा आमतौर पर जब कोई व्यक्ति चलते-चलते गिर जाता है तब रीड की हड्डी में दो जगह चोट लगने की संभावना ज्यादा होती है पहले तो कमर में और दूसरा गले में

 कमर में -क्योंकि शरीर का सबसे ऊंचा अंग हेड होता है और हेड के जस्ट नीचे गला होता है और यहां पर गला मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ा होता है

गिरने की अवस्था में  गला में चोट आने की संभावना है होती है और गले में भी कम से कम 2-5 हड्डी तो पाई जाती है जिनके बीच डिस्क होती है यहां पर डिस्क हर्नियाटेड  का खतरा होता है

गले में-दूसरा डिस्क हर्नियाटेड होने का चांस कमर में होता है कमर में रीड की हड्डी के लंबर वाले हड्डियों में डिस्कनेक्टेड होने का खतरा ज्यादा होता है जिसमें lumber -L1 से लेकर L5 तक की हड्डियों के बीच में डिस्क स्लिप हो जाता है

इसके अलावा भी गले और कमर के हिस्से को छोड़कर बीच का जो हिस्सा होता है वहां पर भी डिस्क का स्लिप होने का खतरा होता है

स्लिप डिस्क से कैसे बचें

आमतौर पर खुद को हमेशा गिरने और ने से सुरक्षित रखें क्योंकि गिरने से ही रीड की हड्डी में तो प्रॉब्लम आती है ,इसके अलावा जब शरीर में मोटापा बढ़ जाता है तब कमर के के एरिया में वसा का मात्रा बढ़ जाता है जिससे कि कभी कभार केंद्रीय तंत्रिका तंत्र परफैट का प्रेसरबन जाता है इसलिए शरीर को फिट रखें

स्लिप डिस्क का उपचार

जब कभी भी आपको लगे की कमर और पैरों में दर्द और जलन दोनों हैं तब आपको किसी अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिए

उनके द्वारा एम आर आई या CT स्कैन करवाने का सजेस्ट दिया जाता है जोकि डिस्क स्लिप होने की जांच करता है और उससे साफ पता चलता है कि रीड की हड्डी में कहां डिस्क डिटेक्ट हुआ है उसके आधार पर ही डॉक्टर द्वारा ट्रीटमेंट किया जाता है

 स्लिप डिस्क के मरीज को क्या नहीं करना चाहिए

  • स्लिप डिस्क के पेशेंट को भारी वजन उठाने से बचना चाहिए क्योंकि डिस्क और खराब हो सकता है जोकि दोबारा रिकवर होने में काफी वक्त लगाता है
  • कोई भी काम को झुककर करने से बचना चाहिए
  • शराब अल्कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे तंत्रिका तंत्र पर बहुत बुरा असर पड़ता है
  • संतुलित और विटामिन युक्त आहार स्वस्थ आहार भोजन में शामिल करना चाहिए जिससे कि हर्नियाटेड डिस्क को रिकवर होने में जल्दी हो सके

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