रिमोट सेंसिंग क्या है | रिमोट सेंसिंग के सिद्धांत | Remote sensing के प्रकार

रिमोट सेंसिंग क्या है-Remote sensing( सुदूर सवेदन ) ही वह उपाय है जिससे हम किसी चीज का पूर्वनुमान या स्तिथि की सटीकता पता लगाते हैं 

इसके अतिरिक्त यह वन संसाधन, खनिज, जल संसाधन, आपदा प्रबंधन जैसे चीजों में उपयोग किया जाता है, आज हम Remote sensing के उदेश्य, विषेसता और Remote sensing के प्रकार के बारे में भी जानेंगे

रिमोट सेंसिंग क्या है

दोस्तों आप सभी news देखते है और आप को हमेशा  news मे मौसम के बारे मे बताया, की पानी कहा गिरेगी कितनी गिरेगी, किसी country मे कितने area मे forest है, कोई प्राकृतिक घटना जैसे भूकंप, सुनामी का अनुमान लगाना ये सब goverment को पता कैसे चलता है,

यह सब Remote sensing( सुदूर सवेदन ) तकनीक से ही पता चलता है,

रिमोट सेंसिंग की परिभाषा

 किसी  object को दूर से ही समझने का कोशिश करना ही , Remote sensing ( सुदूर सवेदन ) कहलाता है

जब सुदूर सवेदन की technology का उपयोग उपग्रह ( उपग्रह क्या है )  द्वारा किया जाता है तब उसे REMOTE SENSING  SATELLITE कहा  जाता हैं

रिमोट सेंसिंग एक ऐसी तकनीक है, जिसमें किसी वस्तु या क्षेत्र का अध्ययन उसके पास गए बगैर बिना उससे सीधे संपर्क में आए किया जाता है. रिमोट सेंसिंग का उपयोग करके हम किसी वस्तु या क्षेत्र की तस्वीरें, वीडियो या अन्य डेटा को एकत्र कर सकते हैं. 

इस डेटा का उपयोग हम विभिन्न उद्देश्यों के लिए कर सकते हैं, जैसे कि मौसम की भविष्यवाणी, भूमि उपयोग, सिटी प्लानिंग ,कृषि, पर्यावरण निगरानी, वन संरक्षण, और आपदा प्रबंधन में .

रिमोट सेंसिंग के लिए विभिन्न प्रकार के उपकरणों का उपयोग किया जाता है, जैसे कि SATELLITE, विमान, और ड्रोन. उपग्रह सबसे लोकप्रिय रिमोट सेंसिंग उपकरण हैं. SATELLITE पृथ्वी की सतह से बहुत दूर से तस्वीरें और वीडियो ले सकते हैं. एयरोप्लेन और ड्रोन भी रिमोट सेंसिंग के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन वे SATELLITE की तुलना में कम ऊंचाई से तस्वीरें और वीडियो ले सकते हैं.

रिमोट सेंसिंग का उपयोग करके हम विभिन्न प्रकार के डेटा एकत्र कर सकते हैं, जैसे कि तस्वीरें, वीडियो, तापमान, आर्द्रता, और ध्वनि. इस डेटा का उपयोग हम विभिन्न उद्देश्यों के लिए कर सकते हैं, जैसे कि:

रिमोट सेंसिंग एक शक्तिशाली उपकरण है, जिसका उपयोग हम विभिन्न उद्देश्यों के लिए कर सकते हैं. रिमोट सेंसिंग का उपयोग करके हम हमारे आसपास की दुनिया को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं और उसे बेहतर बना सकते हैं.

रिमोट सेंसिंग  का प्रकार 

रिमोट सेंसिंग के दो मुख्य प्रकार हैं:

  • ऑप्टिकल रिमोट सेंसिंग: ऑप्टिकल रिमोट सेंसिंग में, किसी वस्तु या क्षेत्र से उत्पन्न  प्रकाश या  विकिरण को  सेंसर द्वारा मापा जाता है. ऑप्टिकल सेंसर विभिन्न प्रकार के प्रकाश को माप सकते हैं, जैसे कि दृश्य प्रकाश, अवरक्त प्रकाश, और माइक्रोवेव प्रकाश.और इसके आधार पर किसी ऑब्जेक्ट के बारे में पूरी जानकारी ज्ञात किया जा सकता है 
  • सक्रिय रिमोट सेंसिंग: सक्रिय रिमोट सेंसिंग में, एक उपकरण की सहायता से किसी वस्तु या क्षेत्र पर प्रकाश या विकिरण डाला  किया जाता है जिससे वह ऑब्जेक्ट उस विकिरण का  परावर्तन करता है और उस  फिर उस प्रकाश को वापस आनेलगा समय को मापा जाता है. सक्रिय रिमोट सेंसिंग का उपयोग उन वस्तुओं या क्षेत्रों का अध्ययन करने के लिए किया जाता है, जो प्रकाश का उत्सर्जन नहीं करते हैं, जैसे कि पानी और भूमि.

ऑप्टिकल रिमोट सेंसिंग का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जैसे कि:

  • मौसम की भविष्यवाणी: रिमोट सेंसिंग का उपयोग करके हम मौसम की स्थिति का अध्ययन कर सकते हैं, जैसे कि तापमान, आर्द्रता, और वर्षा. इस जानकारी का उपयोग हम मौसम की भविष्यवाणी करने के लिए कर सकते हैं.
  • भूमि उपयोग: रिमोट सेंसिंग का उपयोग करके हम भूमि के उपयोग का अध्ययन कर सकते हैं, जैसे कि कृषि, वन, और शहरी क्षेत्र. इस जानकारी का उपयोग हम भूमि उपयोग योजना बनाने के लिए कर सकते हैं.
  • कृषि: रिमोट सेंसिंग का उपयोग करके हम फसलों की स्थिति का अध्ययन कर सकते हैं, जैसे कि फसल की वृद्धि, फसल की बीमारी, और फसल की सिंचाई. इस जानकारी का उपयोग हम फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए कर सकते हैं.
  • पर्यावरण निगरानी: रिमोट सेंसिंग के द्वारा  हम पर्यावरण की स्थिति का अध्ययन कर सकते हैंऔर देख सकते है की कितना परिवर्तन हुआ है , जैसे कि वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, और वनों की कटाई. इस जानकारी का उपयोग हम पर्यावरण संरक्षण के लिए कर सकते हैं.
  • वन संरक्षण: रिमोट सेंसिंग का उपयोग करके हम वनों की स्थिति का अध्ययन कर सकते हैं और पुराने DETA के साथ कपड़े करके वनो की सही स्थिति की पता लग सकते है , इसके अलावा वनों की कटाई, वनों की आग, और वन्यजीवों. इस जानकारी का उपयोग हम वनों को संरक्षित करने के लिए कर सकते हैं.
  • आपदा प्रबंधन:में  रिमोट सेंसिंग की छमताओ का पूरा  उपयोग कर स्थिति का पूरा अनुमान लगा सकते है और इसके आधार पर  हम आपदा प्रबंधन की प्लानिंग कर सकते 

सक्रिय रिमोट सेंसिंग का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जैसे कि:

  • जल निकायों का अध्ययन: सक्रिय रिमोट सेंसिंग का उपयोग करके हम जल निकायों का अध्ययन कर सकते हैं, जैसे कि झीलें, नदियाँ, और महासागर. इस जानकारी का उपयोग हम जल संसाधनों का प्रबंधन करने के लिए कर सकते हैं.
  • भूगर्भीय अध्ययन: सक्रिय रिमोट सेंसिंग का उपयोग करके हम  भूमि के अंदर उपस्थित खनिज और प्राकृतिक संसाधन, जैसे कि चट्टानों, धातु  , तेल और गैस के भंडार.का पता लगाने और उनका दोहन करने के लिए कर सकते हैं.
  • सेना में उपयोग  : सक्रिय रिमोट सेंसिंग का उपयोग करके हम डिफेन्स सेक्टर में अपने आसपास के  लक्ष्य का पता लगाना और निगरानी करना, जैसे कार्यो का संचालन किया जाता है

REMOTE SENSING कैसे किया जाता है –

इस technology की सहायता से किसी object के समीप गये बगैर उससे सम्बंधित सभी जानकारी प्राप्त की जाती है

पृथ्वी में सभी वस्तुएँ सूर्य की प्रकाश में उपस्थिति विकिरण का अवसोसन परावार्तन, या उत्सर्जन   करते हैं

वस्तुएँ द्वारा विकिरण का कुछ अवशोषण के बाद बाकी जो परावार्तन करते हैँ, इस  परावर्तित विकिरण का Remote sensing satelite ( satelite क्या है ) द्वारा  अध्यन कर इसकी तिव्रता और मात्रा को मापा जाता है और data ( DATA CENTER क्या है )बनाया जाता है सभी वस्तुएँ की  निष्कर्ष निकाला जाता है

रिमोट सेंसिंग के उपयोग

REMOTE SENSING  से  प्राप्त data का उपयोग कर  defence , geography map, जल भंडार, मौसम, पर्यावरण, पर्यटन, सैन्य अभियान, शहरी करण और नगर नियोजन  का report बनाया जाता है

इसी data का उपयोग goverment और ngo आपने policy बनाने में करते हैं 

रिमोट सेंसिंग का इतिहास

  1. सन 1800 के मध्य मे पेरिस शहर के एक व्यक्ति  जी तोराकान ने हीलियम  गैस से  भरी गुब्बारे को आसमान मे उड़ाकर उससे कैमरा बांध दिया था जिससे उसने पेरिस की फोटो खींचा
  2. इसके बाद प्रथम विश्व युद्ध मे दुश्मन सेनाओ पर निगरानी के लिए  आसमान से फोटो खींचने के लिए कैमरा को aeroplane  मे लगा कर  उपयोग करने लगे
  3. और जब द्वितीय विश्वा यूद्ध होने लगा तब ऐसे उपग्रह की परिकल्पना की गई जो आकाश से किसी object की निगरानी करती
  4. इसके बाद नित्य नये अविष्कार और खोज की वजह से पिछले कुछ दशक से मानव निर्मित उपग्रह बनाया जाने लगा जो पृथ्वी के orbit में रहकर चक़्कर लगाता रहता है
  5. 1962 में टेल स्टार नामक उपग्रह space में भेजा गया था जिसका काम earth पर redio signal भेजना था लेकिन इसमें बहुत त्रुटि आ रही थी इस वजह से 1963 में सिकोम 2 नामक उपग्रह भेजा गया जो अपने काम में सफल हुआ
  6. सुरुवाती समय में ये उपग्रह मौसमी इपग्रह होते थे जो मौसम की जानकारी उपलब्ध कराते थे
  7. इसमें नया प्रयोग NASA ने किया उसने 1971 में EARTH RESOURCE OBSERVATION SYSTEM – EROS का सफल प्रछेपन किया इस प्रकार नये युग की सुरुवात हुई
  8. इसके बाद 1975 में landsat को nasa ने लांच किया जो अधिक छमता युक्त और सुदूर सवेदन बहुत  प्रभावी थे

सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग क्या है

जब सुदूर सवेदन को किसी उपग्रह द्वारा दूर अंतरिकछ से किया जाता है है तब इसे सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग कहा जाता है इसके लिए बहुत सारे उपग्रह बनाये गए हैं जो अंतरिकछ में पृथ्वी के विभिन्न orbital में राकेट द्वारा स्थापित किये गए हैं

रिमोट सेंसिंग के प्रकार

जब रिमोट सेंसिंग की तकनीक को कई तरीको से उपयोग किया जाता हैं तब ये सब रिमोट सेंसिंग के प्रकार कहलाते हैं आइये इनके बारे में जानते हैं

1 उपग्रह के द्वारा किसी object के परावर्तित प्रकाश का अध्यन कर कई प्रकार का फिल्टर युक्त image बनाया जाता हैं,इस को बारीकी से अध्यन कर यह देखा जाता है की कौन सा object किस रंग का प्रकाश का परावर्तन करता है

इस आधार पर यह देखा जाता है की परावर्तित प्रकाश किस पदार्थ या वस्तु का है

2 ड्रोन से

इसमें drone camera से high defination camera द्वारा किसी object का image या वीडियो लेकर इसका अध्यन कर जरुरी जानकारी निकाल जाता है

इसके अलावा drone में मेंटल डिडेक्टर, सेंसर या अन्य प्रकार का यँत्र भी डला होता है, जिससे चीजों को दूर से समझने में आसानी होती है

रिमोट सेंसिंग के घटक

प्रकश, सेंसर औऱ इलेक्ट्रिकल यँत्र रिमोट सेंसिंग के मुख्य घटक हैं

जीआईएस क्या है 

जीआईएस (जियोग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम) एक तरह का कंप्यूटर सिस्टम होता है जो भूगोलीय डेटा को एक स्थान पर रखने, इसे संचालन करने और विश्लेषण करने के लिए बनाया जाता है। इसका उपयोग कई तरह के कामों में किया जाता है, जैसे:

मानचित्रन:यह सिस्टम मानचित्रों को तैयार करने में मदद करता है, जिससे हम विभिन्न स्थानों की स्थिति और विशेषताओं को समझ सकते हैं।

भू-स्थानिक विश्लेषण: यह उपकरण भूगोलीय डेटा की गहराई से जांच करने में मदद करता है, जैसे कि ज़मीन की सतही संरचना और विशेषताएँ।

भूमि उपयोग योजना: इसका उपयोग ज़मीन के उपयोग की योजनाओं को तैयार करने में किया जाता है, जैसे कि शहरी विकास योजनाएँ और कृषि क्षेत्र की योजनाएँ।

आपदा प्रबंधन:-जब किसी आपदा जैसे कि भूकंप, बाढ़, आदि का प्रबंधन करना होता है, तो यह सिस्टम सहायक होता है।

परिवहन योजनाएँ: वाहनों के आवागमन और जाने की योजनाएँ बनाने में इसका उपयोग होता है।

पर्यावरणीय निगरानी: इससे पर्यावरणीय परिस्थितियों की निगरानी की जा सकती है, जैसे कि जलवायु परिवर्तन और वन्यजीव निगरानी।

इसके माध्यम से आप विभिन्न प्रकार के भूगोलीय डेटा को एक साथ देख सकते हैं और इसका विश्लेषण कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप इसका उपयोग करके किसी शहर की सड़कों, नदियों और पार्कों की जानकारी को देख सकते हैं। इसके साथ ही, आप किसी क्षेत्र में भूमि के उपयोग का अध्ययन भी कर सकते हैं।

जीआईएस एक शक्तिशाली उपकरण है जो विभिन्न कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसके माध्यम से आप आपके पास के आसपास की दुनिया को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और उसे सुधार सकते हैं।

” रिमोट सेंसिंग क्या है ” के बारे आप कुछ पूछना चाहते हैं तो कृपया comment box में जरूर क्वेश्चन पूछे हमें आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा, आप हमारे वेबसाइट vigyantk.com पर यू ही आते रहे जहाँ पर हम विज्ञान , प्रोद्योगिकी, पर्यावरण औऱ कंप्यूटर जैसे विषयो पर जानकारी साझा करते है

FAQ – रिमोट सेंसिंग क्या है

रिमोट  सेंसिंग  SATELLITE को  किससे space में भेजा जाता है

इसके  लिए राकेट technology का उपयोग किया जाता है रॉकेट का engine इतना अधिक पावरफुल होता है की वह आंतरिकछ में भारी pay lode के साथ जा पता है 

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