तंत्रिका तंत्र क्या है | तंत्रिका तंत्र कैसे काम करता है

तंत्रिका तंत्र क्या है-सभी प्रकार की जीव जंतुओं में शारीरिक क्रिया करने के लिए सभी अंगों में संबंध में स्थापित होना चाहिए यह संबंध स्थापित तंत्रिका का तंत्र की वजह से होता है जो की कई प्रकार के उतको से मिलकर बना होता है

 इसकी वजह से ही जीव जंतु सामान्य प्रकार की काम कर सकते हैं जैसे की  खाना खाना, चलना या कुछ और  काम करना इसके  अतिरिक्त  तंत्र के द्वारा  एच्छीक और अनैच्छिक प्रकार का नियंत्रण भी किया जाता है चलिए विस्तार से जानते हैं कि तंत्रिका तंत्र क्या है और तंत्रिका तंत्र कैसे काम करता है

परिचय – तंत्रिका तंत्र क्या है

तंत्रिका तंत्र विशेष प्रकार के  उत्तक से निर्मित एक ऐसा प्रणाली है जो जीवो में सोचने- समझने,भावना और सुनाओ और  संवेदनाओं के द्वारा उत्पन्न बाहरी परिवर्तनों को ग्रहण करने की क्षमता प्रदान करता है तंत्रिका तंत्र कहलाता है

यह तंत्रिका तंत्र कई प्रकार के ऊतक से मिलकर बना होता है इसलिए इस तंत्र की ओर तक भी कहते हैं तांत्रिक की ऊतक न्यूरॉन्स और न्यूरोलॉजी से बना होता है इसका निर्माण भ्रूण के इक्टूडर्म और न्यूरल प्लेट से होता है

और इस प्रकार से देखा जाए तो तंत्रिका तंत्र भी छोटे-छोटे कोशिकाओं से मिलकर बना होता है इस प्रकार तंत्रिका कोशिका कोशिका तंत्र का सबसे छोटा इकाई होता है इसमें साइटान  डेनट्राइटिस तथा axon का महत्वपूर्ण रोल होता है

तंत्रिका तंत्र से उत्पन्न होने वाला आवेगा का संचरण हमेशा axon से dendrites तक होता है

तंत्रिका तंत्र मुख्य रूप से जंतु मैं उपस्थित कोशिकाओं में पाया जाता है

क्योंकि जीव जंतुओं में तंत्रिका तंत्र मैं उत्पन्न आवेग और  समन्वय उन्हें किसी कार्य को करने के लिए आवश्यक होता है इस तंत्रिकी समन्वयं कहा जाता है

तंत्रिकीय समन्वयं की परिभाषा

जब तंत्रिका तंत्र द्वारा उत्पन्न आवेग को तंत्रिका तंत्र के द्वारा ही उसकी क्रियायों का समन्वय किया जाता है तब कोई कार्य संपादित होता है इसे ही तंत्रिकीय समन्वयं  कहा जाता है

तंत्रिका तंत्र कैसे काम करता है

शरीर में उपस्थित संवेदी अंगों मैं उपस्थित संवेदी तंतु कोशिकाओं के द्वारा  संवेदनाओं को मस्तिष्क तक मेरुरज्जु के अंदर उपस्थित केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के द्वारा संदेश भेजा जाता है इस स्थिति में मस्तिष्क और मेरुरज्जु से संवेदनाओं को शरीर के प्रभावी भागों में न्यूरोन तथा प्रेरक न्यूरोन के बीच समन्वयं का कार्य समंजन न्यूरोन करता है

तंत्रिकीय समन्वयं को कराने वाले अंग

हमारे शरीर में उपस्थित ऐसे अंग जो तांत्रिक समन्वयं  को करवाने में सहायक होते हैं तंत्रिकीय समन्वयं सवेदांग कहलाता है

इसमें तीन प्रकार के अंग शामिल  होते हैं

सेंस ऑर्गन्स,संचार तंत्र और कार्य करने वाले अंग

सेंस ऑर्गन्स

इसमें हमारे शरीर की ऐसे अंग आते हैं जो आवेग को sens करते हैं जैसे की आंख कान त्वचा  नाक और जीभ इत्यादि,इनके द्वारा बाहरी आवेग को ग्रहण किया जाता है

संचार तंत्र

संचार तंत्र में हमारे शरीर में उपस्थित तंत्रिका तंत्र के द्वारा मस्तिष्क तक इनफॉरमेशन को भेजा जाता है

 कार्य करने वाले अंग

मस्तिष्क को प्राप्त इनफॉरमेशन को संपादित करने के लिए मेरुरज्जु द्वारा इनफॉरमेशन को अंगो तक फैलाया जाता है

मनुष्य का तंत्रिका तंत्र

मानव शरीर में तंत्रिका तंत्र के द्वारा बहुत सारी कार्य संपादित की जाती हैं  ऐसी कार्य जागे होने और सोने के बाद भी संपादित किए जाते हैं हमारे शरीर कि मस्तिष्क में तंत्रिका तंत्र के द्वारा आवेग को पहुंचाया जाता है इसके बाद कार्य संपादित करने के लिए केंद्रीय तंत्रिका तंत्र द्वारा मेरुरज्जु की सहायता से निश्चित अंग को आदेश दिया जाता है 

इसके बाद कोई कार्य संपादित होना माना जाता है,वास्तव में तंत्रिका तंत्र कोई आसान तंत्र नहीं है यह बहुत ही  जटिल तंत्र है जिसमें सभी अंगों का आपसी  तालमेल जरूरी है लेकिन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र इसमें मुख्य भूमिका निभाता है हमारे शरीर में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र रीड की हड्डी में में स्थापित होती है

 केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में किसी भी प्रकार की चोट या रोग तंत्रिका तंत्र में व्यवधान उत्पन्न करता है इस कारण हमें सदा सतर्क होना चाहिए

तांत्रिक किससे बना होता है

हमारे शरीर में उपस्थित जितने भी अंग और पदार्थ हैं वे सभी कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं यह कोशिकाएं खुद को का निर्माण करती हैं और ऊतक से ही तंत्रिका तंत्र का निर्माण होता है तंत्र का तंत्र का बाहरी आवरण epineurium से ढका होता है तंत्रिका तंत्र का आकार पतला भी होता है मोटा भी होता है मोटे तंत्रिका तंत्र में कई पतले तंत्रिका तंत्र पूल होते हैं और इन प्रत्येक पूल पर पेरीन्योरियम का आवरण चढ़ा होता है और इन प्रत्येक तंत्रिका तंत्र पर endoneurium का आवरण चढ़ा होता है

तांत्रिकाएं तंत्रिका तंतु ( nerve fiber ) के रूप में अनेक न्यूरॉन्स का बने होते हैं और जब यह तांत्रिक मेरूराज से होकर निकलता है तब इसे nerve trunk कहा जाता है

तंत्रिका तंतु की विशेषताएं

  • तंत्रिका तंत्र में उत्तेजनशीलता और आवेग का संचालन किया जाता है इसे किसी भी प्रकार के आवेग जैसे यांत्रिक,तापीय रासायनिक और विद्युत आवेश से उत्तेजित किया जा सकता है
  • तंत्रिका तंतु में उत्तेजनशीलता उत्पन्न करने के लिए कम से कम बाहरी कारक का होना आवश्यक होता है
  • जब तंत्रिका तंतू एक बार उत्तेजित हो जाता है तब दूसरा आवेग के लिए वह रिस्पांस नहीं करता
  • तंत्रिका तंत्र थकान का अनुभव नहीं करता
न्यूरॉन्स की संरचना कैसी होती है

हमारे शरीर में होने वाले सभी कार्यों के लिए मस्त मस्तिष्क तक इनफॉरमेशन आना जरूरी होता है और इसके लिए न्यूरॉन्स को हमेशा एक्टिव रहना पड़ता है इसको समझने के लिए तंत्रिका कोशिका ( न्यूरॉन्स )की संरचना को हमें समझना होगा

न्यूरॉन्स

यह तंत्रिका तंत्र की सबसे छोटी इकाई होती है जिसका आकार चार माइक्राम से 135 माइक्रोन तक होता है इसको कई भागों में विभाजित किया जा सकता है जिसमें से प्रमुख भाग होता है कोशिकाकाय इसे इंग्लिश में cyton भी कहा जाता है

इसमें एक गोल केंद्र के तथा कोशिका द्रव भी उपस्थित होती है इस कोशिका द्रव में माइटोकांड्रिया golgy body, लाइसोसोम तथा एंडोप्लास्मिक रेटिकुलम के अलावा बहुत सारी छोटी-छोटी कोशिकाएं पाई जाती है

कोशिकाकाय से dendrones और axons निकलते हैं

dendrones

इनमें हाथ की उंगली की समान संरचना पाई जाती है और उंगली के समान ही आधार भाग मोटा होता है इसके शीर्ष भाग पतले होते हैं जो कि कई शाखों में बाटे होते हैं इन्हें ही  dandrities  कहा जाता है इनमें मिसिल्स कण पाए जाते हैं

 axons

यह कोशिका का से निकलने वाले एकल  लंबे और बेलनाकार रचना को axons या तांत्रिकक्ष कहा जाता है

और इसके अंतिम भाग की संरचना जड़ के समान होती है

तंत्रिका तंत्र के कार्य

  • यह शरीर के विभिन्न भागों की क्रियाओं का नियमन और नियंत्रण करता है।
  •  यह विभिन्न ग्रन्थियों एवं ऊतकों के  से समन्वय बनाकर शरीर के आन्तरिक वातावरण का नियमन और नियंत्रण करता है।
  • .यह विभिन्न संवेदी अंगों के माध्यम से जीव को बाह्य पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों के प्रति आभास कराता है।
  • आरेखित और रेखित पेशियां के द्वारा शरीर की विभिन्न अंगों का नियंत्रण किया जाता है

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