जड़ों का रूपान्तरण | modification of roots in hindi | पादप मूल का रूपांतरण

जड़ों का रूपांतरण

जब पेड़ पौधों में उपस्थित जड़ किसी विशेष कार्य के लिए अपना आकार  कार्य करने की स्थिति बदलती है तब इसे जड़ों का रूपांतरण कहा जाता है

जड़ों का रूपांतरण विशेष उद्देश्य के लिए किया जाता है जैसे

  • भोजन का संग्रहण करना
  • पेड़ पौधों को खड़ा रखकर यांत्रिक सहारा देना
  •  प्रकाश संश्लेषण कार्यों में सहायता करना
  • स्वसन कार्य करने हेतु सहायता 
  • ग्रंथि के रूप में रूपांतरण
  • पौधों की इन रूपांतरण के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं
  • मूसला जड़ के रूप में
  • अपस्थानिक जड़ के रूप में 

A भोजन का संग्रहण करना -मूसला जड के रूप में

इस प्रकार के जाने भोजन संग्रहण का कार्य करने लगती है इसकी वजह से इसकी आकार में परिवर्तन होने लगती है इस प्रकार के पौधे हैं

शंक्वाकार ( conical )

ऐसे जोड़ों में आधार भाग बहुत फैला हुआ होता है तथा एक एक शंकु के आकार का संरचना बनाता है, 

गाजर शंक्वाकार  जड़ का उदाहरण है

तरकु रूप ( fusifom )

इस प्रकार के जोड़ों में मध्य का भाग ज्यादा फूला हुआ रहता है इस प्रकार की जड़ का उदाहरण है मूली

कुम्भीरूप ( Napiform)

इस प्रकार के जड़ों में जड़ का आकार पूरी तरह से गोलाकार हो जाता है जिसमें ऊपर में छोटा तना और पत्ते लगे होते हैं, और निचे का भाग हल्का से संकु जैसे होता है, जिसकी वजह से इसका आकार लट्टू के जैसे होता है

कंदिल (  tuberous    )

इस प्रकार की जोड़ी खाद्य पदार्थ की संग्रहण के कारण अनियमित रूप से  फूल जाती हैं जिससे जड़ का कोई निश्चित आकार नहीं होता और यह यह जड़ किसी एक जगह पर फूल हुआ नहीं होता

B पेड़ पौधों को खड़ा रखकर यांत्रिक सहारा देना

पेड़ पौधे में उपस्थित चढ़ा सिर्फ जल और खनिज लवण की स्थानांतरण के लिए उपयोगी नहीं होती बल्कि पेड़ पौधों को खड़ा खड़ा रखने के लिए एक आधार भी उपलब्ध कराते हैं जड़ की सहायता से खड़ा होता है जिसकी वजह से पेड़ अपना सर्वांगीण विकास जैसे ऊंचाई बढ़ाना शाखाओं का विकास करना शाखा तनों की मोटाई बढ़ाना और पति के साथ  फूल और बीज का उत्पाद को बनाए रखता है

इसके अलावा आपने देखा होगा कि उष्णकटिबंधीय पेड़ पौधों और लताओं में जड़ के क्षेत्र से कोई- नया लता शाखा ऊपर की ओर बढ़ती जाती है और लता के साथ ही  लपेटते हुए आगे बढ़ती है इस प्रकार यह लताओं को यांत्रिक आधार प्रदान करती है

इस प्रकार की शाखाओं को पुस्त मूल कहा जाता है

Example -सेमल 

 C प्रकाश संश्लेषण कार्यों में सहायता करना

D स्वसन कार्य करने हेतु सहायता

Mangrove पेड़ की प्रजाति में इनकी जड़ें स्वसन कार्य के लिए उपयुक्त होती है, इन जड़ों को न्यूमेटाफोर जड़ कहा जाता है, यह जड़ पौधे और वातावरण के बीच गैस का आदान-प्रदान करते हैं

मैंगो प्रजाति का पौधा हमेशा नमकीन पानी वाली दलदली क्षेत्र में पाया जाता है इन्होंने पेड़ पौधों की जड़े कुछ नीची ऐसी होती है और कुछ मिट्टी की सतह पर फैली होती हैं इनसे एक लकड़ी का टुठ जैसा संरचना निकलता है जिसकी ऊपरी सिरा में बहुत छोटे-छोटे चिद्र होते हैं इन चिद्र के द्वारा गैस का आदान प्रदान किया जाता है

E ग्रंथि के रूप में रूपांतरण- सहजीवी अन्तः क्रिया करने के लिए

बहुत सारे दलहनी पौधे होते हैं जिनके जोड़ों में ग्रंथि का निर्माण हो जाता है जिससे गांठ कहा जाता है इनक गांठो पर बहुत सारे सहजीवी जीवाणु अपना घर बना लेते हैं और nitrogen का स्थिरीकरण करते हैं

यह जो जीवाणु पौधों के जड़ो में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं इन्हें रायजोबीएम जीवाणु कहा जाता है यह सहजीवी संबंध के रूप में पेड़ पौधे के जड़ों में सहजीवी संबंध दर्शाते हैं यह जीवाणु वायुमंडल से  नाइट्रोजन को स्थिरीकरण करता है और इस प्रकार का यह नाइट्रोजन पौधे के लिए आवश्यक होता है

CONCLUSION – जड़ों का रूपांतरण

सभी पौधों में उपस्थित जड़ का रूपांतरण बहुत सारे कार्यों के लिए रूपांतरित होते हैं क्योंकि जो की पौधों की कई प्रकार की विशेषताओं को संभव बनाते हैं इस पोस्ट पर हमने आपको जड़ों के रूपांतरण के स्वरूप उनकी कामों में आई विविधता के बारे में हमने आपको बताया है

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