लाइसोसोम क्या है | लाइसोसोम-संरचना, कार्य, प्रकार

लाइसोसोम क्या है

लाइसोसोम कोशिका में पाया जाने वाला एक पाचक एंजाइम है जो की एकल कला वाला थैलीय रचना होती है, इसके द्वारा कोशिका के अंदर कोशिकीय पदार्थ का पाचन किया जाता है

कभी-कभी इनकी कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाने की वजह से लाइसोसोम बाहर आ जाता है और दूसरे कोशिकांग पर गिरकर उसे मार डालती है इसलिए को लाइसोसोम को आत्महत्या की थैली कहा जाता है

तब बात यह आती है कि  लाइसोसोम जैसे खतरनाक पदार्थ  का कोशिका में निर्माण क्यों होता है तब यह नोट करने वाली बात है कि  लाइसोसोम ही एक ऐसा पदार्थ है जो की मृत पदार्थ और कोशिका का सफाई करता है

अधिकांश जंतु कोशिका में पाई जाती है इसके अलावा कुछ कटक जैसे न्यूरोस्पोरा, ईस्ट और हरे शैवाल में ही पाए जाते हैं

लाइसोसोम की उत्पत्ति अन्तः पद्रवी जलिका और गोलजी बॉडी से होती है इसे सर्वप्रथम DE DUVE ने पादप और जंतु कोशिकाओं के अंदर 1955 में देखा तथा इसके द्वारा कोशिकीय पदार्थ का अपघटन करने के कारण लाइसोसोम नाम दिया गया

लाइसोसोम की संरचना

जब इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से इसको देखा जाता है तब हम इसके बारे में जानकारी होती है यह फिल्म में रचना होती है प्रत्येक लहसुन के अंदर कल 24 प्रकार के पाचक एंजाइम उपलब्ध होते हैं उनके नाम

Protease, ribonuclease, de oxyribonuclease, phosphate, sulphatase

यह सभी प्रकार की एंजाइम acid की उपस्थिति के कारण ही क्रिया कर पाते हैं इस कारण इन्हें एसिड हाइड्रोलाइसिस कहा जाता है जब भी किसी कारणवस इस प्रकार के एंजाइम लाइसोसोम से बाहर आ जाते हैं तब कोशिका की विभिन्न पदार्थ जैसे प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट न्यूक्लिक अम्ल आदि का विघटन हो जाता है जिसके  परिणाम स्वरूप कोशिका विखंडित हो जाती है

  • प्राथमिक लाइसोसोम
  •  द्वितीयक लाइसोसोम
  • अवशिष्ट लाइसोसोम
  • सवाभक्षी लाइसोसोम

प्राथमिक लाइसोसोम

यह गलजी उपकरण की सिस्टर्नी की माइक्रो कोशिका से बने होते हैं तथा इसकी छोटी थैली में  निष्क्रिय प्रकार के एंजाइम पाए जाते हैं

 द्वितीयक लाइसोसोम

इसमें निर्मित लाइसोसोम के द्वारा बाहरी पदार्थ का पाचन किया जाता है इस कारण इसे द्वितीय लाइसोसोम की पंचक राजधानी कहा जाता है

अवशिष्ट लाइसोसोम

जब द्वितीयक लाइसोसोम का पचा हुआ पदार्थ कोशिका द्रव्य में मिल जाता है तो बिना पचा हुआ पदार्थ वहाँ बच जाता है इस प्रकार द्वितीयक लाइसोसोम को ही अवशिष्ट लाइसोसोम कहा जाता है 

स्वभक्षी लाइसोसोम

जब यह अपनी ही कोशिका में पाए जाने वाले कोशिकांग जैसे माइटोकांड्रिया एंडोप्लास्मिक रेटिकुलम जैसे अंगों का पाचन करते वक्त बनता है

लाइसोसोम के कार्य

लाइसोसोम की उपस्थिति के कारण श्वेत रक्त कणिका मोनोसाइट्स और ग्रेन्यूलोसाइट्स अपना कार्य कर पाते हैं, लाइसोसोम के द्वारा  कोशिकीय पाचन किया जाता है

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