जीन क्लोनिंग क्या है | जीन क्लोनिंग कैसे की जाती है

जीन क्लोनिंग क्या है

 क्लोनिंग एक ऐसी क्रिया जिसमें एकमात्र जनक जो फीमेल होगी से बिना सेक्सुअल कांटेक्ट बनाए बगैरा अपने जनक के समान अनुवांशिक एवं शारीरिक रूप से पूर्णता समानता  वाले संतान उत्पन्न किए जाते हैं  इसके लिए  क्लोनिंग शब्द का उपयोग किया जाता है

इसको हम आपको दूसरी शब्दों में बताते हैं 

क्लोनिंग का क्या मतलब है

जीन क्लोनिंग क्या है hindi – किसी भी जीव के समान अनुवांशिक एवं शारीरिक संरचना युक्त जीव बनाया जाता है तब यह प्रक्रिया क्लोनिंग कहलाती है

क्लोनिंग के लिए किस टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाता है 

क्लोनिंग के लिए नाभिकीय स्थानांतरण तकनीक का उपयोग किया जाता है

जीन क्लोनिंग कैसे की जाती है?

इस तकनीक के द्वारा जीवो का जो शरीर होता है वह कोशिका से बना होता है कोशिका में पाया जाने वाला नाभिक पदार्थ(DNA) को नाभिक की स्थानांतरण तकनीक द्वारा निकाल कर नाभिक रहित अंडाणु में प्रवेश कराया जाता है

इसके बाद कोशिका विभाजन के लिए इसमें विद्युत तरंग प्रवाहित की जाती है जिससे कोशिका का विभाजन होना चालू हो जाता है ,

 यह ठीक उसी प्रकार होता है जिस प्रकार किसी जीव के गर्भ में अंडाणु का निषेचन के बाद कोशिका विभाजन होता है

इसके बाद निषेचित भ्रूण को फीमेल के गर्भ में स्टेबल करवाया जाता है जिससे कि उसे  प्लेसेंटा के अंदर विकास के लिए पूर्ण माहौल मिले

  क्लोनिंग   के लिए निषेचन के बाद भ्रूण को बाहरी मशीन में नहीं रखा जाता, अधिकांश लोग सोचते हैं की क्लोनिंग को पूरे मशीन में ही कराया जाता है, जबकि निषेचन गर्भ के बाहर करवाया जाता है

 और निषेचन होने के बाद निषेचित भ्रूण को जीव के गर्भ में रखा जाता है इसके बाद ही भ्रूण को अपने में विकास करने के लिए पूरा माहौल मिलता है

भ्रूण को गर्भ मे रखने के बाद जब भ्रूण कुछ महीनों बाद पूर्ण विकसित होता है तब प्राकृतिक रूप से लेबर (प्रसव )द्वारा पूर्ण विकसित जीव बाहर आता है जिसके लिए हम पैदा होना  शब्द का उपयोग करते हैं

क्लोनिंग के लिए परंपरागत रूप से भ्रूण क्लोनिंग या ट्विनिंग पद्धति का उपयोग किया जाता है जिसके द्वारा जीवो के कोशिकाओं का उपयोग कर उसके नाभिक द्वारा जीव प्रतिरूप तैयार किया जाता है

सर्वप्रथम क्लोनिंग किसके द्वारा किया गया

सन 1997 में डॉक्टर  इयान विल्मट द्वारा क्लोनिंग का प्रयास किया गया है उन्होंने व्यस्क क्लोनिंग का उपयोग कर डाली नामक एक भेड़ का क्लोन तैयार किया था

परंतु इससे पहले ही क्लोनिंग की नीव गढ़ चुकी थी

1975 में गार्डन नामक व्यक्ति ने nuclear ट्रांसफर तकनीक का आविष्कार किया था जिसमें इयान विल्मट और उसके सहयोगि कीथ कपेबल के साथ उन्होंने इसके साथ सेल साइकिल तकनीक और न्यूक्लियर ट्रांस तकनीक के साथ मर्ज कर दिया जिससे कई तकनीकी समस्याएं दूर हुई

इसके बाद इयान विल्मट और उसके सहयोगियों द्वारा निरंतर भेड़ के क्लोनिंग के लिए प्रयास किए जाने लगे और 276 प्रयासों के बाद सन 1997 में डाली नामक भेड़ का पूर्ण रूप से सफल क्लोनिंग करने का श्रेय इयान विल्मट और उसके सहयोगी को मिला

पहला सफल क्लोन जंतु कौन है

डाली नामक  भेड़ पहला सफल जंतु क्लोन था 

डाली नामक भेड़ का क्लोनिंग कैसे किया गया था

किसी जीव क्लोनिंग बनाने के लिए व्यस्क जीव का चयन किया जाता है जिससे कि पूर्ण रूप से अनुवांशिक और शारीरिक रूप से विकसित जीव का विकास किया जा सके 

जबकि डाली नामक भेड़ जो 6 वर्ष की थी और गर्भवती भी थी उस वक्त उसके ब्रेस्ट  से निकले हुए दूध का उपयोग क्लोनिंग के लिए किया गया था

मानव में क्लोनिंग

जब आजकल तकनीक ने बहुत प्रगति कर ली तब बात आती है कि काश हम इंसानों द्वारा भी किसी अपने को दोबारा देखना संभव हो सके

 किन्तु क्लोनिंग द्वारा  यह सोच निश्चित रूप से भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली होगी

 लेकिन इसी प्रकार का technology का उपयोग कर आजकल इन विट्रो फर्टिलाइजेशन द्वारा उनके लिए बच्चा पैदा किया जाता है जो मां बाप बनने में सक्षम नहीं होते हैं

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन में मेल और फीमेल के अंडाणु और शुक्राणु का उपयोग कर लैब में अंडाणु को शुक्राणु के साथ में निसेचित किया जाता है और उसके बाद निषेचित अंडे को फीमेल के गर्भ में स्थापित किया जाता है जिससे कि प्लेसेंटा द्वारा उसका पालन पोषण किया जा सके

लेकिन इन विट्रो फर्टिलाइजेशन का एक दोस है कि इसके द्वारा मनचाही अनुवांशिक और शारीरिक रचना युक्त बच्चे पैदा नहीं किया जा सकते हैं,बच्चे में अपने माता-पिता दोनों का अनुवांशिक गुण होता है

क्लोन से मानव भ्रूण तैयार करना

 मानव द्वारा क्या-क्या नया नहीं सोचा जाता इसी कड़ी में वैज्ञानिकों ने सोचा कि क्लोन से ही मानव भ्रूण बनाया जाए

तब अमेरिका में एक निजी कंपनी द्वारा एडवांस टेक्नोलॉजी से विश्व का पहला मानव भ्रूण रोलिंग तकनीक से बनाने का दावा किया गया,

2001 में कंपनी से दी गई जानकारी के अनुसार मानव भ्रूण पार्थो जेनेसिस तकनीक के द्वारा बनाया गया था

 जिसमें अनफर्टिलाइज्ड अंडे को एक्टिव किया गया उसके बाद उसमें से कोशिका निकालकर उस कोशिका से मानव डीएनए निकाला गया और उसमें मानव का डीएनए दोबारा मिला दिया गया इसके बाद उन्होंने देखा कि अंडाशय विभाजन करने लगा

 और ऐसी ही करके उन उन लोगों ने आठ अंडाणु द्वारा चार कोशिकाओं के मानव भ्रूण बनाए गए

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन सामान्य क्लोनिंगसे थोड़ी सी अलग है जहां पर क्लोनिंग द्वारा शरीर के किसी कोशिका द्वारा डीएनए निकालकर दूसरी  कोशिका से डीएनए निकालकर मिलाया जाता है तब नया जीव बनता है,

किंतु इन विट्रो फर्टिलाइजेशन में मादा का अंडा और पुरुष का शुक्राणु मिलाकर है नया बच्चा पैदा किया जाता है इन विट्रो फर्टिलाइजेशन आज पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और वैधानिक मान्यता भी इसे प्रदान की गई जबकि वही क्लोनिंग द्वारा किसी मनुष्य को बनाना आज भी अवैधानिक माना जाता है

FAQ- जीन क्लोनिंग क्या है

Q जेनेटिक क्लोनिंग कैसे काम करती है?

A कोशिका से नाभिकीय पदार्थ निकलकर अंडाणु में प्रवेश कराया जाता है जिससे कोशिका विभाजन प्रारम्भ होता है 

Q विश्व का प्रथम क्लोन क्या है?

डाली नामक भेंड़  पहला क्लोन था 

Q जीन क्लोनिंग क्या है

GENE ट्रान्सफर  का उपयोग कर अपने सामान जिव बनाने की टेक्नोलॉजी जीन क्लोनिंग है 

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दोस्तों इस पोस्ट पर हमने आपको बताने की कोशिश की है कि जीन क्लोनिंग क्या है और जीन क्लोनिंग कैसे किया जाता है जीन क्लोनिंग के लिए नाभिकीय स्थान तरण तकनीक का उपयोग किया जाता है जिसके द्वारा किसी जीवित जी उसे कोशिका लेकर उसके नाभिक का उपयोग कर पूर्णता समानता वाला जीव बनाया जाता है

इसके आधार पर हमें आपको यह बताया कि क्लोनिंग कितने प्रकार की जा सकती है और इतिहास में पहली बार क्लोनिंग किसके द्वारा किया गया था

उम्मीद है क्लोनिंग के बारे में हमारी या जानकारी आपको पसंद आई होगी जो कि हमने जीन क्लोनिंग क्या है और जीन क्लोनिंग कैसे किया जाता है के टॉपिक पर बनाया था,आप इस टॉपिक से संबंधित अन्य भी क्वेश्चन कमेंट बॉक्स पर जरूर पूछ सकते हैं

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