blue green algae क्या है | सायनोबैक्टीरिया क्या है | Cyanobacteria In Hindi

blue green algae क्या है-इसको इंग्लिश में ब्लू (ग्रीन एलगी नील हरित शैवाल ) कहा जाता है इसके अलावा इसे सायनोबैक्टीरिया भी कहा जाता है यह एक ऐसा जीवाणु हैं जिसमे प्लांट्स के सामान chlorophyll होता हैं, इसकी यही सब विशेषता इसे दूसरे शैवाल और bacteriya से इसे अलग बनाता हैं चलिए इस पोस्ट पर आपको नील हरित शैवाल के बारे में विस्तार से बताते है 

blue green algae क्या है

साइनोबैक्टीरिया को जीवाणु और शैवाल का लक्षण     युक्त माना जाता है इसमें शैवाल और बैक्टीरिया के समान विशेषता होती है इसमें प्रोकरयोटिक बैक्टीरिया और शैवाल की तरह प्रकाश संश्लेषण करने की क्षमता होती है

इनके द्वारा बैक्टीरिया के समान सरल संरचना प्रदर्शित की जाती है तथा विखंडन की क्रिया द्वारा दो भागों में गुणित होते हैं

इन्हीं सब विशेषताओं के कारण COHN द्वारा सुझाव दिया गया कि ब्लू ब्लू ग्रीन एलगी और बैक्टीरिया को एक साथ रखा जाना चाहिए इसके पश्चात ही बैक्टीरिया के नामकरण की अंतरराष्ट्री CODE के अनुसार ब्लू ग्रीन एलगी को साइनोबैक्टीरिया नाम दिया गया

साइनोबैक्टीरिया के लक्षण

  • साइनोबैक्टीरिया एक कोशिकीय और बहु कोशिकीय होते हैं
  • यह दूसरे बैक्टीरिया के जैसे ग्राम नेगेटिव होते हैं
  • इसमें पेड़ पौधे के जैस क्लोरोफिल ए, कैरटी नायड्स, सी – फायको साइनिन और सी फायको एरिथ्रीन नामक प्रकाश वर्णक पाए जाते हैं
  • इनकी कोशिका में सुगठित केंद्रक का आभाव होता है
  • पादप काय बहु कोशीकिय होने कारण समूहन  की प्रवृत्ति पाई जाती है
  • इन में प्रजनन अंग नहीं पाए जाते हैं
  • साइनोबैक्टीरिया में प्रजनन वरधी प्रकार का होता है

साइनोबैक्टीरिया की  कोशिका संरचना

कोशिका आवरण  cell envelope 

  • इसमे पाये जाने वाली कोशिका संरचना  primitive प्रकार का होता है
  • जीवाणु कोसा आवरण दो स्तरो का बना होता है
  • यह औरण पेक्टिक पदार्थ का बना होता है
  • अधिकांश साइनोबैक्टीरिया में यह आवरण रंगहीन होता है किंतु कभी-कभी वर्णक की उपस्थिति पाई जाती है
  • इन आवरण में जल धारण क्षमता पाई जाती है

Protoplasm

  • प्रोटोप्लाज्मा कोशिका झिल्ली से घिरा होता है
  • प्रोटोप्लाज्मा दो भाग centroplasm और chromoplasm  में बटा होता है
  • centroplasm केंद्रीय और रँगहीन भाग है
  • क्रोमप्लाज्मा बाहरी भाग है जिसमे नीला हरा वर्णक होता है
  • वर्णक से जुडा हुआ पटलिका को thyla koid कहा जाता है
  • centroplasmic में DNA पाया जाता है 

साइनोबैक्टीरिया में प्रजनन

A- वरधी प्रजनन

में विखंडन, खंडन, और hormogones प्रकार का होता है

  • विखंडन- इसमें बॉडी से एक उभार होकर कोशिका दो भागो में बट जाता है, और इसी वक्त chromotien भी दो भागो में विभक्त होता है 
  • खंडन- इसमें तंतु या कॉलोनी छोटे छोटे खंडो मे टूट जाता है और प्रत्येक खंड टूटकर पूर्ण विकसित कॉलोनी बनाता है 
  • hormogones- साइनोबैक्टीरिया में पाये जाने वाला तंतुवत trichomes, सीथ के अंदर ही छोटे छोटे भागो में विभाजित हो जाता है जिसे hormogones कहा जाता है जब ये hormogones मोटी भित्ति वाले हो जाते हैं तब इसे hormospores कहा जाता है

A- अलैगिक जनन

अलैगिक जनन 2 प्रकार के spores द्वारा होता है 

Akinetes – वरधी कोषाओ के वृद्धि से बनते है इसमें प्रतिकूल अवस्था सहने वाली विश्राम कोशिका होती है और अनुकूल दशा में ये अंकुरित होकर नया तंतु बनाते है

साइनोबैक्टीरिया का आर्थिक महत्व

  • इसकी बहुत सारी प्रजाति nitrogen स्थिरण करती है जो भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में सहायक होती है
  • Anabaena और spirulina को हरी खाद के रूप में उपयोग किया जाता है
  • Aulosira और anabaena तालाबों झीलों में मच्छर के प्रजन्न को बाधक करने में सहायता करते है
  • इसके अलावा साइनोबैक्टीरिया के कुछ नुकसान भी है oscillatoria, crococcus जैसे  साइनो जीवाणु जल को प्रदूषित भी करते है 

CONCLUSION – blue green algae क्या है

साइंस के इस अद्वितीय रचना के बारे में जानना बहुत ही रोचक है इसकी संरचना बाकि creature से बहुत अलग है क्योंकि इसमें bacteriya और शैवाल दोनों के गुण होते है उपरोक्त पोस्ट नील हरित शैवाल क्या है के बारे में आपको पढ़कर केसा लगा आप हमें अवश्य बताये 

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