कार्बन क्रेडिट क्या है | carbon credit market

कार्बन क्रेडिट क्या है  ( कार्बन बाज़ार )

जब कोई देश या फैक्ट्री द्वारा जब कार्बन उत्सर्जन दिये गए मानक से कार्बन उत्सर्जन करता है तब उन्हें एक क्रेडिट स्कोर मिलता है,

इस क्रेडिट स्कोर का उपयोग बेचने के लिए किया जाता है जिसके लिए मूल्य चुकाना होता है जो की बहुत बड़ी धनराशि होती है, इसके अतिरिक्त जब कोई फैक्ट्री मानक उत्सर्जनलेवल  से जादा मात्रा में कार्बन उत्सर्जन करता है तब उसपे penalty लगायी जाती है जो की एक बड़ी धनराशि hoti है

इसकी तुलना में कार्बन क्रेडिट थोड़ी सस्ती होती है इसलिए मल्टीनेशनल कम्पनिया इस कार्बन क्रेडिट की तलाश में होती है जिससे की भारी penalty से बचा जा सके

और दूसरे तरीके से इसे देखे तो यह पैसे कमाने और प्रदूषण कम करने का एक जरिया भी है

कार्बन क्रेडिट की सुरुवात कैसे हुई

दुनिया में कार्बन क्रेडिट की शुरुआत 23 जून पेरिस ग्रीनहाउस गैस ओके उत्सर्जन के लिए करणी नियम बनाया गया जिसमें हर किसी को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की लिमिट पर लाने के लिए बाध्य किया गया 

इसके तहत यदि किसी देश या किसी इंस्टिट्यूट के द्वारा किसी टायर लिमिट से कम ग्रीनहाउस गैस स्टेशन उत्सर्जन करने से उसे कार्बन क्रेडिट देने की घोषणा की गई किंतु जब कोई संस्था यह देश के द्वारा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन लिमिट से अधिक मात्रा में गैस उत्पन्न किया जाए तब क्या होगा

इस स्थिति में यह निर्णय लिया गया कि जिस संस्था के द्वारा ग्रीनहाउस गैस की लिमिट मात्र से कम गैस उत्सर्जन किया जाए तब उसे कार्बन क्रेडिट दिया जाना चाहिए और वह संस्था इस कार्बन क्रेडिट को दूसरे संस्था को पैसे के बदले दे सकती है जिससे उसे संस्था का लाभ हुआ और बाकियों को भी ग्रीनहाउस गैस कम उत्सर्जन करने की प्रेरणा मिलेगी

इसके अतिरिक्त जो संस्था अधिक मात्रा में ग्रीनहाउस गैस उत्पन्न करती है उसे बार-बार कार्बन क्रेडिट लेने की जरूरत पड़ेगी जिसकी वजह से उसे पर आर्थिक बोझेगी बढ़ेगी इस प्रकार वह संस्था भी ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कमी जाने का प्रयास करेगा

इस प्रकार का प्रयास क्योटो प्रोटोकॉल मैं भी किया गया था जिसका भी उद्देश्य था कि ग्रीनहाउस गैस की उत्सर्जन को कम कैसे किया जाए किंतु इसमें वास्तविक कार्य पेरिस समझौता के बाद ही प्रारंभ हुआ

कार्बन क्रेडिट मार्केट क्या है

कार्बन क्रेडिट मार्केट वह जगह है जहाँ कार्बन उत्सर्जन कम करने वाले प्रोजेक्ट्स की क्रेडिट, जिन्होंने वायु प्रदूषण को कम किया हो, की व्यापारिक खरीदी-बिक्री होती है। यहाँ एक व्यक्ति या कंपनी जो कार्बन उत्सर्जन को कम कर रही है, अपने कार्बन क्रेडिट को बेच सकती है 

और दूसरों कंपनी या देश इस कार्बन क्रेडिट के लिए भुगतान कर सकती है। और इसका उपयोग अपने फ़ैक्ट्री या प्रोजेक्ट में उपयोग किये जाते है 

कार्बन क्रेडिट की आवश्यकता क्यों है?

कार्बन क्रेडिट की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि हमारी धरती पर कार्बन उत्सर्जन से गहरी पर्यावरण समस्याएं उत्पन्न हो रही  हैं। यह उत्सर्जन जलवायु परिवर्तन को तेजी से बढ़ा रहा है, जिससे वायु प्रदूषण और जलवायु संकट जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

कार्बन क्रेडिट इस समस्या का समाधान हो सकता है क्योंकि यह उन लोगों या प्रोजेक्ट्स को समर्थन देता है जो कार्बन उत्सर्जन कम करने में सक्षम हैं। इससे न केवल वातावरण की रक्षा होगी, बल्कि नई ऊर्जा प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है। कार्बन क्रेडिट से लोगों को एक ग्रीन रेवालूशन  का हिस्सा बनने का अवसर मिलता है, जिससे हम साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

कार्बन क्रेडिट के लाभ

यहाँ कुछ कार्बन क्रेडिट के लाभों की एक सूची है:

1. पर्यावरण संरक्षण

 कार्बन क्रेडिट का उपयोग करके प्राप्त की गई धनराशि से पर्यावरण संरक्षण पर प्रयास किया जा सकता है, जैसे वन्य जीवन की सुरक्षा या ग्रीन एनर्जी  परियोजनाओं को प्रारम्भ करना 

2. स्थायित्व में सुधार यह संरक्षण कार्यों या पर्यावरणीय पहलों के माध्यम से कार्बन प्रदूषण को कम कर सकता है।

3. सार्वजनिक संदेश

 इससे लोगों को पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन को कम करने की जागरूकता बढ़ाने का अवसर मिलता है।

4 . सामाजिक प्रतिष्ठा

 व्यापार या संगठनों को सामाजिक दृष्टिकोण से अधिकतम प्रतिष्ठा प्राप्त हो सकती है, जिसमें कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए किए गए प्रयासों का समर्थन प्राप्त किया जा सकता  है।

5 . निवेश का अवसर

 कार्बन क्रेडिट्स को खरीदकर, यह विभिन्न प्रोजेक्ट्स में निवेश का एक स्रोत भी बन सकता है।

6 . गैर-नकारात्मक प्रभाव

 कार्बन क्रेडिट्स का उपयोग करने से, नकारात्मक कार्बन प्रभाव को संतुलित करने में मदद मिलती है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

कार्बन क्रेडिट से संबंधित विवाद
  • पेरिस संधि में इ स प्रकार की घोषणा की गई थी कि यह सिर्फ  विकासशील देशों में लागू होगा
  •  यह संधि विकसित देशों पर लागू नहीं होता था
  • जिस किसी विकासशील देश के पास कार्बन क्रेडिट है उनके द्वारा कार्बन क्रेडिट को दूसरे विकसित देशों द्वारा खरीद नहीं गया है
  • विकसित देशों के द्वारा यह विरोध किया जा रहा है कि पेरिस समझौता पूरी तरह से सभी के साथ न्याय नहीं कर रही
  • कार्बन क्रेडिट बचने के बाजार में यह देखा गया है कि कार्बन क्रेडिट को कई बार बेचा गया और खरीदा गया है जबकि से एक बार ही बेचा और खरीद जाना चाहिए
  • वही विकासशील देशों का कहना है कि कार्बन क्रेडिट को बेचने के बाद भी उन्हें ग्रीनहाउस गैस उसे  उत्सर्जन की कम लिमिट को दोबारा दिखाने की परमिशन दी जानी चाहिए
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