बायोस्फियर रिज़र्व जोन क्या है | Biosphere Reserves in Hindi

बायोस्फियर रिज़र्व जोन क्या है

बायोस्फियर रिज़र्व जोन क्या है-जो क्षेत्र जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र होते हैं उन्हें इंग्लिश में बायोस्फियर रिज़र्व जॉन कहा जाता है यह वास्तव में पर्यावरण संरक्षण की इन सीटू कंजर्वेशन मेथड है जिसमें किसी क्षेत्र विशेष पर पाया जाने वाले वनस्पतियों और जीव जंतुओं को सुरक्षित करने के लिए बायोस्फीयर रिजर्वायर जोन की घोषणा की जाती है

जिस प्रकार हमारे देश में नेशनल पार्क और अभ्यारण है उसी प्रकार बायोस्फियर रिज़र्व जोन किसी बहुत बड़ी इलाके में स्थापित की जाती है जहां पर पेड़ पौधे और जीव जंतुओं के लिए कई प्रकार के कंजर्वेशन मेथड अपना जान जाते हैं

Biosphere Reserves zone

बायोस्फियर रिज़र्व जून ऐसा पर्यावरण क्षेत्र होता है जहां पर पाया जाने वाले स्थानीय पेड़ पौधे और जीव जंतुओं का उनके प्राकृतिक निवास स्थल पर ही in सीटू कंजर्वेशन मेथड का उपयोग कर उन्हें सुरक्षित करने का प्रयास किया जाता है जिसके अंतर्गत ऐसे क्षेत्रों में मनुष्यों की सक्रियता काम की जाती है और पूरी तरह से वन्य और वन्य जीव को प्रभावित किए बगैर ऐसा वातावरण बनाया जाता है जिससे वन्य और वन जीवन की स्थिति में सुधार होती है और उनकी जनसंख्या बढ़ती है

बायोस्फियर रिज़र्व जून घोषित करने के बाद पैसे क्षेत्र में मनुष्यों की एक्टिविटी को कम कर पशु की शिकार लकड़ी कटाई जैसे कार्यों को बंद करवाया जाता है और या पूर्ण रूप से कोशिश की जाती है कि जीव जंतुओं का प्राकृतिक आवास में किसी प्रकार का छेड़छाड़ ना हो इसलिए बायोस्फियर रिज़र्व जोन में स्थिति को कोर एरिया में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की एम्पलाई के अलावा अन्य व्यक्तियों को जाना मना ही होती है

 भारत में सबसे पहले बायोस्फियर रिज़र्व जॉन की घोषणा 1986 में नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व जोन घोषित किया गया न नीलगिरी बायोस्फियर रिज़र्व जॉन 225 वर्ग किलोमीटर एरिया में फैला हुआ है जो कि भारत के

पश्चिमी घाट और नीलगिरी पर्वतमाला पर फैला हुआ है भारत के पश्चिमी घाट पर स्थापित होने की वजह से यह क्षेत्र जैव विविधता और वर्षा वनों की मुख्य केंद्र साबित हुआ

बायोस्फियर रिज़र्व जोन कब प्रारंभ किया गया

वन्य और वन जीवन का संरक्षण के लिए बायोस्फीयर प्रोग्राम को सर्वप्रथम  UNESCO के द्वारा मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम लॉन्च किया गया 1971 में,जिसका मुख्य उद्देश्य था कि हमारे पृथ्वी पर उपस्थित सभी प्रकार की जीव जंतुओं को उनके प्राकृतिक आवास मैं ही पूर्णता सुरक्षित किया जाए जिससे कि उनकी कम होती आबादी उनके निवास स्थल पर ही बढे और मनुष्य की इलीगल एक्टिविटी को खत्म करना उनका एक उद्देश्य रहा जो की फलित होती दिखाई दे रही है

बायोस्फियर रिज़र्व जोन की उद्देश्य

  • पारिस्थितिक तंत्र में उपस्थित सभी प्रकार की पेड़ पौधे और जीव जंतुओं की जानकारी रखना
  • पारिस्थितिक तंत्र में उपस्थित सभी प्रकार के पेड़ पौधे और वन्य जीवों का संरक्षण का प्रयास करना
  • वनस्पतियों और जीवन की अनुवांशिक विविधता को सुरक्षित करने का कोशिश करना
  • जीवो के संरक्षण के लिए मौलिक और आधारभूत अनुसंधान क्रियाओ को बढ़ाना
  • जैविक संसाधनों के उचित प्रबंधन को बढ़ावा देना
  • विश्व में उपस्थित अंतर्राष्ट्रीय वन्य जीव संरक्षण में कार्यरत संस्थाओं के साथ सहयोग करना

बायोस्फियर रिज़र्व जोन को कितने भागों में बांटा गया है

बायोस्फियर रिज़र्व जोनको तीन भागों में बांटा गया है जिसमें

  • कोर जोन
  • बफर जोन
  • ट्रांजैक्शन जोन

कोर जोन

यह जैव मंडल रिजल्ट क्षेत्र का सबसे केंद्रकृत भाग होता है जहां पर वन्य और वन जीवन का प्राकृतिक निवास होता है ऐसे स्थान पर मानवीय गतिविधियां पूर्णतया प्रतिबंधित होती है जिसका उद्देश्य होता है कि यहां पर वन्य और वन जीवन पूर्णतया प्राकृतिक आवास में विकास करें और जैव विविधता का संरक्षण हो

कोर जोन में वन विभाग के कर्मचारियों के अलावा किसी और का जाना प्रतिबंधित होता है

बफर जोन

बफर जोन जैव मंडल आरक्षित स्थल का वह क्षेत्र होता है जहां पर नियंत्रित रूप से मानवी गतिविधियां संचालित की जाती है जिसका उद्देश्य होता है कि ऐसे क्षेत्रों में पर्यटन ट्रेनिंग और शिक्षण किया जा सके और यह खास ध्यान रखा जाता है कि बफर जोन,कोर जोन से बहुत अधिक दूरी पर हो

ट्रांजैक्शन जोन

यह जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र का सबसे बाहरी आवरण होता है जो किसी गांव खेत और रोड से  लगा होता है

भारत में अभी तक जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र

भारत में अभी तक 13 जय मंडल आरक्षित क्षेत्र घोषित किए गए हैं जिसमें

नाम दफा -अरुणाचल प्रदेश

नाम दफा अरुणाचल प्रदेश में उपस्थित है जहां पर दुनिया में एकमात्र जल में पाया जाने वाला नेशनल पार्क है जिसे कि बिल लें  के नाम से जाना जाता है 

फूलों की घाटी- उत्तराखंड

उत्तराखंड में फूलों की घाटी अपने जंगली फूलों के लिए प्रसिद्ध है

मन्नार की खाड़ी =तमिलनाडु

समुद्र तट से लगा हुआ बायोस्फियर रिज़र्व जॉन है जो की वर्षा वन से पटा हुआ है और जैव विविधता की भरमार है

 सुंदरबन- पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में पाए जाने वाला सुंदरबन नेशनल पार्क बायोस्फियर रिज़र्व जोन में शामिल है क्या स्थान सुंदरी पेड़ और रॉयल बंगाल टाइगर के लिए प्रसिद्ध है इसकी अतिरिक्त सुंदर नेशनल पार्क रामसर स्थल भी है क्योंकि यहां पर कई छोटे बड़े दलदलीय क्षेत्र हैं जहां पर जैव विविधता की भरमार है

थार मरुस्थल= राजस्थान

मानस -असम

यह भी असम में स्थापित बहुत ही सौंदर्य बायोस्फियर रिज़र्व जोन है

कच्छ का रण -गुजरात

कच्छ कारण गुजरात में अपनी जंगली गधों के लिए प्रसिद्ध है इसकी अतिरिक्त इस क्षेत्र में जीरो फाइट प्लांट्स और अपनी हिरन के लिए ज्यादा प्रसिद्ध है

अंडमान का उत्तरी द्वीप

अंडमान भारत में पूर्व और दक्षिण में समुद्री सीमा पर लगा हुआ है यह स्थान अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है

 नंदा देवी -उत्तराखंड

नंदा देवी उत्तराखंड में स्थापित एक बायोस्फियर रिज़र्व जॉन है जो की खास तौर पर पहाड़ी क्षेत्र में पाया जाने वाले वनों के लिए ज्यादा प्रसिद्ध है नंदा देवी की पहाड़ियां और वहां की प्राकृतिक सुंदरता अद्वितीय है

काजीरंगा- असम

काजीरंगा नेशनल पार्क असम में स्थापित है यहां पर राइनो पाया जाता है जो की बहुत ही दुर्लभ प्रजाति क्या है इसके अलावा काजीरंगा नेशनल पार्क पर शेर तेंदुआ बाघ भालू जैसे वन्य जीव भी पाए जाते हैं

कान्हा किसली- मध्य प्रदेश

कान्हा किसली मध्य प्रदेश में स्थापित एक नेशनल पार्क है जो खास तौर पर भारतीय शेरों के लिए प्रसिद्ध है

नौकरेक -मेघालय

नीलगिरी पश्चिमी घाट -कर्नाटक

भारत के पश्चिमी घाट पर स्थापित यह जैव आरक्षित क्षेत्र पूर्णता प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है नीलगिरी में वर्षा वन भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं जिसकी वजह से यहां पर वन्य जीवों की अच्छी खासी जनसंख्या है शेर पूंछ मकाक पश्चिमी घाट का बहुत ही प्रसिद्ध जीव है

Conclusion -बायोस्फियर रिज़र्व जोन क्या है

बायोस्फीयर रिज़र्व जोन 1971 में UNESCO द्वारा स्थापित किया गया जिसका मुख्य उदेश्य होता है कि वन्य और वन्यजीवों का उनके प्राकृतिक आवास पर संरक्षण किया जा सके हमारे भारत में नीलगिरि बायोस्फियर रिज़र्व जोन की स्थापना 1986 में किया गया था,

बायोस्फीयर रिजर्व में मानवीय गतिविधियां पूर्ण रूप से नियंत्रित होती हैं जहां पर वन्य और वन्याओं की संरक्षण विकास और प्रजनन जैसे कार्य FOREST डिपार्टमेंट द्वारा किए जाते हैं इसकी अतिरिक्त बफर और कोर क्षेत्र में अनुसंधान कार्य फारेस्ट डिपार्टमेंट द्वारा किया जाता है और कोशिश किया किया जाता है कि उनकी कार्यों से किसी भी प्रकार से वन्य और वन्य जीवों को प्रभाव न पड़े

वास्तव में बायोस्फियर रिज़र्व किसी विशेष स्थान पर जैव विविधता को CONSERV करने का प्राकृतिक तरीका है जहां पर उनके प्राकृतिक निवास पर ही इन सीटू का कजर्वेशन मेथड का उपयोग कर उनका संरक्षण किया जाता है

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