नेत्र विकारों की संपूर्ण जानकारी

नेत्र विकारों की संपूर्ण जानकारी

 हमारे कक्षा 12वीं तक के पाठ्य पुस्तक में नेत्र की संरचना, कार्य पद्धति और नेत्र की विकार के बारे में बताया गया है किंतु इसके अतिरिक्त हमारे दैनिक जीवन में भी नेत्र विकास संबंधित बहुत सारे सवाल आते रहते हैं, इसलिए हमारा यह पोस्ट आपको नेत्र विकार के संबंध में संपूर्ण जानकारी देगी आप जान पाएंगे कि नेत्र विकार कितने प्रकार के होते हैं और उनका उपचार किस प्रकार किया जाता है आईए जानते हैं

निकट दृष्टि दोष  (  near sighteness   or myopia  )

यह हमारे नेत्र गोलक में होने वाला एक विकार है जिसमें हमारे नेत्र गोलक का आकार बढ़ जाता है और लेंस अधिक उत्तल हो जाता है जिसकी वजह से रेटिना में प्रतिबिंब न बनकर उससे पहले बन जाता है इस रोग के निवारण के लिए अवतल लेंस के चश्मे का उपयोग किया जाता है

 दूर दृष्टि दोष  ( far sighteness or hypermetropia )

इस नेत्र विकार में नेत्र गोलक का आकार छोटा हो जाने की वजह से और कार्निया का अवतल हो जाने की वजह से प्रतिबिंब retina पर नहीं बन पाता बल्कि रेटिना के बाहर पीछे की ओर बनता है इस वजह से इंसान को धुंधला दिखाई देता है इसके निवारण के लिए उत्तल लेंस का चश्मा लगाया जाता है

कनेक्टिवाइटिस ( conjuctivitis )

यह रोग  आंखों की संक्रमण की वजह से होती है जिसमें आंख लाल हो जाती है और दर्द या सूजन भी हो जाती है जिसकी वजह से आंखों से आंसू निकलता है सुबह सो कर उठने पर आंखें एक दूसरे से चिपकी हुई होती है इसकी इलाज के लिए डॉक्टर पास जाना चाहिए

जीरॉप्थाल्मिया ( xerophthalmia )

आंखों में होने वाला यह रोग  टामिन ए की कमी से होता है इसकी वजह से कंजेक्टिव में क्रिएटिनिन का  जमाव हो जाता है जिससे धुंधलापन दिखाई देता है

भेगापन (  strabismus)

आंखों में होने वाली भेंगापन सिलियरी मांसपेशियों में शीथिलता होने की वजह से होता है

 मोतियाबिंद ( cataect )

नेत्र की इस विकार में आंखों में पाया जाने वाले लेंस चपटा हो जाता है तथा लेंस अपारदर्शी हो जाता है जिसकी वजह से देखने में समस्या आती है इसको ऑपरेशन के जरिए से ही ठीक किया जाता है

कालामोतिया  ( glucoma )

नेत्र की सिलयरी  मांसपेशियों द्वारा द्रव पदार्थ हमेशा नेत्र गोलक में रिसता रहता है और  स्लिम  द्वारा वापस भेज दिया जाता है किंतु स्लिम में अवरोध हो जाने की वजह से द्रव नेत्र गोलक में दबाव बढ़ा देता है जिसकी वजह से देखने की क्षमता प्रभावित होती है

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